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चैनलों के लिए बन ही गया टास्क फोर्स

टीवी कार्यक्रमों पर नजर और नियंत्रण रखने के लिए केन्द्र सरकार ने जिस प्रसारण नियामक प्राधिकरण (ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेटरी ऑथोरिटी) का प्रस्ताव 2007 में दिया था, उस पर अब तक चल रहे मीडिया के तमाम विरोधों के बाद एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स का काम चैनलों के लिए एक कंटेंट कोड और प्रस्तावित प्रसारण प्राधिकरण पर आम राय बनाना होगा।

टास्क फोर्स में सरकारी प्रतिनिधि के तौर पर सूचना व प्रसारण मंत्रलय के सचिव और अतिरिक्त सचिव हैं जबकि चैनलों की तीन प्रतिनिधि संस्थाओं के सदस्यों को इसमें बतौर सदस्य शामिल किया गया है। ब्रॉडकास्ट एडीटर्स एसोसिएशन की ओर से इसके अध्यक्ष शाजी जमां और सचिव एनके सिंह, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन की ओर से इसके अध्यक्ष समीर मनचंदा और केवीएल नारायण राव, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन की ओर से अवनीन्द्र मोहन और दीपक जेक ब इस टास्क फोर्स के सदस्य होंगे।

यह टास्कफोर्स आम लोगों, उपभोक्ता संगठनों, शिक्षाविदों, राज्यों के प्रतिनिधियों, अखबारों के संपादकों, कानूनविदों, केबल ऑपरेटरों, डीटीएच, आईपीटीवी, रेडियो कंपनियों के प्रतिनिधियों वगैरह से बात करेगा। मकसद है, केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एक स्वतंत्र प्रसारण नियामक के गठन और चैनलों के कार्यक्रमों के बारे में इन लोगों की राय लेना। सरकार ने इस टास्कफोर्स से कहा है कि वह जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

उधर, चैनलों के इन संगठनों के एक सदस्य ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि टास्क फोर्स का गठन चैनलों पर सरकारी नियंत्रण (प्रस्तावित प्रसारण नियामक प्राधिकरण के जरिए) की दिशा में सरकार की एक अन्य कोशिश है। उक्त सदस्य ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त कोई प्राधिकरण ‘स्वतंत्र’ नहीं हो सकता और चैनलों का आत्मनियंत्रण का फार्मूला ही कारगर उपाय है।

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