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आंकड़ों से बड़ी एक शख्सियत

हमला विरेन्दर सहवाग का सबसे बड़ा हथियार हैं। इसीलिये रिकार्ड का वे पीछा नहीं करते हैं, बल्कि रिकार्ड उनका पीछा करते हैं। उन्होंने अपने विस्फोटक खेल से ठुकठुकिया टेस्ट क्रिकेट की मायने बदल दिये हैं। उसमें गति भर दी है। ट्वेंटी-20 क्रिकेट के आने के बाद कहा जाने लगा था कि टेस्ट क्रिकेट की मौत सुनिश्चित है। लेकिन सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में एक नई जान भर दी है। उन्होंने टेस्ट की क्लासिकीय परम्परा को खत्म कर गेंद उड़ाऊ तकनीक को जन्म दिया है। टेस्ट क्रिकेट के महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर जब मैदान पर होते थे तो हारते हुये मैच को वह अपने धीमे खेल से बचा लेते थे। लेकिन सहवाग ने अपनी तेज बल्लेबाजी से इंडिया को मैच जीतने की आदत डालनी शुरू की है। वे जब खेलते हैं तो गेंदबाज को मानसिक रूप से तोड़ देते हैं। गेंद में भुस भर देते हैं। दुनिया के महान गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन की गेंदों पर जब मुबंई के ब्रेबार्न स्टेडियम में उन्होंने चौके-छक्के उड़ाये तो मुरलीधरन की बेबसी देखते ही बनती थी। मुरलीधरन की फजीहत बनाने के बाद सहवाग का कहना था कि दुनिया के इस सबसे खतरनाक ऑफ स्पिनर का सामना करना बड़ी चुनौती है। उसके जैसे स्पिनर के सामने आक्रामक खेलना ही सर्वश्रेष्ठ रणनीति है, अन्यथा वह दबाव बना लेता है। उसे इसका मौका देने से अच्छा है कि पहली गेंद से ही उस पर दबाव बना लिया जाये। यही कारण है कि अब सहवाग को विवियन रिचर्ड्स से भी खतरनाक माना जाने लगा है। 20 अक्टूबर 1978 को दिल्ली के नजफगढ़ में जन्मे सहवाग को प्यार से वीरू भी बुलाते हैं। स्वभाव से वे अकड़ू होने के साथ मिलनसार भी हैं। अकड़ते वे तब हैं, जब कहीं कुछ गलत हो रहा होता है। वैसे वे मिलनसार है। साथी खिलाड़ियों की मदद करते हैं। उनका हौसला बुलंद करते हैं। उनका एक बेटा भी है। आमतौर पर सहवाग अपने दौरे में अपनी पत्नी आरती और बेटे को ले जाते हैं, जो उनका हौसलाअफजाई करते हैं। बल्ले से सहवाग का आमना-सामना सात माह की उम्र में ही हो गया था। जब वह छोटे थे तो उनके पिता किसन सहवाग ने उन्हें खिलौने वाला बल्ला दिया था। पूत के पांव पालने में ही दिख गये थे। इसके बाद बारह साल की उम्र में वह क्रिकेट के दौरान अपना दांत तुड़वाकर घर पहुंचे तो पिता ने क्रिकेट खेलने पर बैन लगा दिया था। यह बैन उनकी मां के हस्तक्षेप के बाद ही टूट पाया था। उसके बाद तो क्रिकेट उनका हमेशा पहला प्यार बना रहा। मुबंई में श्रीलंका के खिलाफ तीन तिहरे शतक का विश्व रिकार्ड बनाने से मात्र सात रन से चूक गये। सहवाग ने इससे पहले 2008 में चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 319 जबकि 2004 में मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ 309 रन की पारी खेली थी। वह 290 और 299 के बीच आउट होने वाले दुनिया के चौथे बल्लेबाज भी बने। सहवाग भारत की ओर से सर्वाधिक छ: दोहरे शतक बनाने वाले बल्लेबाज हैं। दायें हाथ के इस बल्लेबाज के नाम अब 72 मैचों में 17 शतक और 19 अर्धशतक से 52.50 की औसत से 6248 रन हैं। टेस्ट क्रिकेट में रिकार्ड तीसरा तिहरा शतक जड़ने से चूके सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग मायूस कतई नहीं हैं। उनका कहना है कि मैं बहुत खुश हूं कि 293 रन बनाये।

 

 

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