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27 फरवरी, 2020|9:08|IST

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अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के प्रति कोर्ट कठोर

अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के प्रति कोर्ट कठोर

उच्चतम न्यायालय ने अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कठोर रुख अपनाते हुए कहा कि न केवल यह जनहित में नहीं हैं बल्कि इससे खरीदार भी प्रभावित होंगे क्योंकि प्राधिकरण इन्हें ध्वस्त कर देगा।

न्यायमूर्ति वीएस सिरपुरकर और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की एक पीठ ने गौहाटी में एक अपार्टमेंट के कुछ हिस्सों को ध्वस्त करने का आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी कि अगर अदालतों ने ऐसे मामलों में नरमी का रुख अपनाया तो इससे देश में अवैध इमारतों के निर्माण का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

न्यायालय ने कहा कि यह सामान्य ज्ञान की बात है कि बड़े शहरों में जमीन की कमी के कारण मंजूर किए गए नक्शे से कहीं बड़े, अवैध और अनधिकत निर्माण किए जा रहे हैं। ऐसी कारगुजारियों के साथ कड़ाई से निपटना पड़ेगा अन्यथा बिल्डर और कालोनाइजर मंजूर किए गए नक्शों से भी कहीं बड़े निर्माण करते रहेंगे। पीठ ने कहा कि खरीदारों को भी फ्लैट खरीदते समय पर्याप्त सतर्कता बरतनी होगी।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आखिरकार इस प्रकार की कारगुजारियों का शिकार फ्लैट के मालिक ही होंगे क्योंकि आम आदमी चाहता है कि उसके सिर पर अपनी छत हो। इस प्रकार के निर्माण निश्चित तौर पर जनहित के विपरीत और इन बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

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