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कमाने से नहीं कर्ज देने में है परहेज

बिहारियों के पैसे से भरपूर कमाई कर रहे बैंक कर्ज देने में कमाल की कंजूसी बरत रहे हैं। राज्य में मात्र सात ऐसे जिले हैं जहां बैंकों ने कुल जमा राशि (सीडी अनुपात) का 40 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा कर्ज दिया है। वह भी तब जबकि यहां के लोगों ने बैंकों में 93,244 करोड़ रुपये जमा कर रखे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 21127 करोड़ रुपये कर्ज देने का लक्ष्य है जबकि बैंकों ने सितम्बर तक  मात्र 7788 करोड़ रुपये कर्ज दिये। यह लक्ष्य का 36 प्रतिशत है। कर्ज पाने वालों में पटना, भागलपुर और गया जैसे जिले भी शामिल नहीं है जहां के लोगों ने सर्वाधिक पैसे बैंकों में जमा कराएं हैं।

नतीजा किसान क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता समूहों और शिक्षा कर्ज के बड़ी संख्या में आवेदन अटके पड़े हैं। अब जाकर वित्त विभाग ने तमाम लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) को कर्ज देने में तेजी लाने को कहा है। 
  जमा की तुलना में बैंकों ने सबसे अधिक 48.78 प्रतिशत कर्ज पूर्णिया में जबकि सबसे कम 20.15 प्रतिशत कर्ज सीवान में दिया है। कर्ज के प्रतिशत के आधार पर जिलों को चार वर्गो में रखा है। पहले वर्ग में मुजफ्फरपुर, अररिया, कैमूर, कटिहार, पश्चिम चम्पारण, पूर्णिया और किशनगंज जैसे जिले हैं जिन्हें 40 प्रतिशत से अधिक कर्ज मिला। दूसरे वर्ग में रोहतास, गया, पूर्वी चम्पारण, बांका, बेगूसराय, शिवहर, सीतामढ़ी, खगड़िया, समस्तीपुर और सुपौल हैं यहां 30-39 प्रतिशत आवेदकों को कर्ज मिला। तीसरे वर्ग में औरंगाबाद, अरवल, नवादा, जमुई, मधेपुरा, सहरसा, गोपालगंज, मधुबनी, वैशाली, बक्सर, नालन्दा, शेखपुरा, भागलपुर और पटना में 25-29 प्रतिशत जबकि भोजपुर, लखीसराय, छपरा, सीवान, मुंगेर और दरभंगा में 25 प्रतिशत से भी कम जरूरतमंदों को कर्ज मिल पाया। सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक को आवेदकों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी है। 

     अधिक राशि जमा करने वाले जिले
जिला  रकम (करोड़) कर्ज (प्रतिशत)
पटना  30978  29.46
मुजफ्फरपुर 4273  40.49
गया  3410  30.38
छपरा  3125  24.30
भागलपुर 2866  29.40

      कम राशि जमा करने वाले जिले
जिला रकम (करोड़) कर्ज (प्रतिशत)
शिवहर 264  37.96
अरवल 384  28.09
शेखपुरा 424  26.31
किशनगंज 591  48.91
लखीसराय 720  22.45

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