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परेश बरूआ के बगैर नहीं निकलेगा समाधानः विशेषज्ञ

उल्फा अध्यक्ष अरविंद राजखोवा की गिरफ्तारी से असम के जटिल उग्रवाद समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है लेकिन विशेषज्ञों एवं समूह के सदस्यों का कहना है कि कमांडर इन चीफ पेरश बरूआ के बगैर अंतिम हल नहीं निकल सकता।

मशहूर लेखिका और शांति वार्ता की पूर्व मददगार इंदिरा गोस्वामी ने कहा कि परेश बरूआ को नहीं नकारा जा सकता। अगर सरकार अध्यक्ष को शामिल कर वार्ता को आगे बढ़ाना चाहती है तो यह बड़ी भूल है। दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर ने कहा कि सरकार के अपने कारण हो सकते हैं लेकिन जो व्यक्ति कैडर और कोष को नियंत्रित कर रहा है उसे नकारा नहीं जा सकता। बरूआ के बिना शांति वार्ता निर्थक और निष्फल रहेगी।

राज्य पुलिस के पूर्व प्रमुख हरेकष्ण डेका ने कहा कि राजखोवा की हिरासत से संगठन और केंद्र के बीच वार्ता की राह आसान होगी लेकिन अगर बरूआ को इस प्रक्रिया से अलग रखा जाता है तो राज्य में हिंसा का अंत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बरूआ राज्य में गड़बड़ी फैलाने के लिए पूरा प्रयास करेगा क्योंकि उसके समर्थकों का अपना समूह है और संगठन की क्षमता को साबित करने के लिए वह बेचैन होगा। उल्फा के गिरफ्तार उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई ने भी कहा कि राजखोवा और बरूआ को वार्ता के लिए आवश्यक रूप से उपस्थित होना चाहिए।

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