अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

न्यायालयों में मुकदमों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय:सिंह

पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह ने न्यायालयों में मुकदमों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुकदमों की संख्या को कम करने के लिए आपसी सुलह व्यवस्था कारगर साबित हो सकती है।
 

न्यायमूर्ति सिंह ने दरभंगा व्यवहार न्यायालय परिसर में नव निर्मित विधिक सहायता सह सुलह केन्द्र का लोकार्पण करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायालयों में मुकदमों की बढ़ती संख्या से विधिक व्यवस्था चरमरा रही है।

उन्होंने कहा कि आपसी सुलह के आधार पर मुकदमों में न्याय दोनो पक्षों को मिलता है इसलिए इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से न्यायालयों में काम का बोझ भी कम होगा। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता मेल मिलाप का साधन है और मेलमिलाप न्याय की आत्मा है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य के न्यायालयों में मेल मिलाप को बढावा दिया जा रहा है और इसके लिए अधिवक्ताओं का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि अब 50 हजार रूपए वार्षिक आय वालों को भी विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि आज ज्यादा मुकदमा परिवार के आपसी सदस्यों के बीच है ऐसे में हम लोक अदालतों में आपसी सदभाव एवं समझौते के आधार पर मुकदमों का फैंसला कर आपसी वैमनस्यता को भी दूर कर सकते हैं।
 
पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि न्याय का अर्थ सही सुलभ और त्वरित हो। देर से मिला न्याय न्याय नहीं मिलने जैसा है। उन्होंने अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि वे आपसी सुलह एवं समझौता के आधार पर मुकदमों के निष्पादन में सहयोग करें और इसके लिए मुवक्किलों को भी प्रेरित करें। सुलह केन्द्र मुवक्किलों को परामर्श देने में अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाए तो जल्द ही मुकदमों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाया जा सकता है।
 
इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिलेश चंद्रा ने दरभंगा जिला में तीन और अपर जिला एवं सत्र न्यायालय खोलने की मांग करते हुए कहा कि मुकदमों की संख्या अधिक है लेकिन न्यायालय कम है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:न्यायालयों में मुकदमों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय:सिंह