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दिल्ली में जुटेंगे एड्स के 350 मरीज

करीब 23 साल पहले देश में एचआईवी के वायरस की पहचान होने के बाद से अब तक हजारों लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। दो दशकों से अधिक समय गुजर चुका है लेकिन एचआईवी पॉजिटिव से ग्रस्त लोगों की चुनौतियां जरा भी कम नहीं हुई हैं। उन्हें आज की जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध नहीं है।

इन सभी मुद्दों के अलावा देश में एचआईवी मरीजों की स्थिति के बारे में बातचीत करने और इसकी वास्तविकता मरीजों की जुबानी सुनने के लिए पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) 'द नेशनल कंसल्टेशन ऑन प्रोमोटिंग एक्सेस टू केयर एंड ट्रीटमेंट' का आयोजन करने जा रहा है। नौ दिसंबर से 11 दिसंबर के बीच चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवा केंद्र में देश के 14 राज्यों के करीब 350 एचआईवी पॉजिटिव लोग अपनी बात रखेंगे। वे अपना अनुभव सुनाएंगे।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य एड्स, टीवी और मलेरिया के लिए वैश्विक कोष (जीएफएटीएम) से इनकी सहायता पहुंचाने वाले लोगों को एक मंच पर लाना भी है।

कार्यक्रम में नाको की सह सचिव अनुराधा जौहरी मुख्य अतिथि होंगी। ग्लोबल फंड प्रोग्राम्स, पीएफआई, के परियोजना निदेशक डॉ. मैरी वर्गीज ने कहा कि स्वयंसेवी संगठनों के संघ और निजी क्षेत्र के सहयोग से आयोजित होने वाला यह पहला कार्यक्रम है। स्वयंसेवी संगठनों के संघ ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के साथ मिलकर छह सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों और आठ प्रभावित हो सकने वाले राज्यों में कई सेवाएं उपलब्ध करवाया है। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और मणिपुर, जबकि प्रभावित हो सकने वाले राज्य हैं - उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार और छत्तीसगढ़।

कार्यक्रम में एचआईवी ग्रस्त लोगों के अधिकारों की रक्षा और उसे बढ़ावा देने में कानून की भूमिका, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और स्वास्थ्य बीमा आदि विषय पर चर्चाएं होंगी।

कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को 'आंतरिक शांति और बाह्य गतिशीलता' प्राप्त करने का तरीका बताएगी।

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