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3000 किसानों के घर मनी दीवाली

आखिरकार नंदीग्राम के बाद गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद के किसानों ने सरकार व उद्योगपतियों से चली आ रही जंग जीत ली। हाईकोर्ट के आए निर्णय ने एक बार फिर से सात गांव के 3000 किसानों के चेहरों पर खुशी लौटा दी है।

हाईकोर्ट ने धारा-4 खत्म कर किसानों के हक में निर्णय दिया तभी किसान झूम उठे और गांवों में दीवाली का माहौल बन गया, हालांकि देहरा गांव में एक युवक की मौत की कसक भी लोगों में कहीं न कही रही। फिर भी इस खुशी को वह लोग भी छिपा नहीं पाए।

जादोपुर गांव का हर बच्चा खुशी से कूद रहा था। उसे पता नहीं था कि आखिर क्या हुआ। जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि पापा ने बताया है कि उनकी जमीन उन्हें मिल गई है। स्थानीय किसान सहित परिवार की औरतें 8 जुलाई 06 का दिन नहीं भूले हैं जब पुलिस ने उनके साथ हैवानियत भरा व्यवहार किया था।

सरेआम पुलिस ने महिलाओं को पीटा, छोटे-छोटे बच्चों को पटका और बच्चों के बाप व बाप के आगे जवान बेटे को अधमरा कर दिया। छोटे बच्चों को डराने के लिए उनको पकड़ सामने हवाई फायरिंग की गई। आज भी कई किसान उस पिटाई का दर्द ङोल रहे हैं।

इस दिन तत्कालीन डीजीपी बुआ सिंह ने अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों के लिए स्वयं मोर्चा लिया और एक हैवानियत भरा खेल कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया। आंदोलन इसके बाद यह और भड़का, लेकिन उस दिन जिस तरह पुलिस ने किसानों के साथ अत्याचार किया, वह इस आंदोलन में कभी नहीं हुआ।

इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वी.पी.सिंह ने इस भूमि पर स्वयं हल चलाकर इसे अधिग्रहण से मुक्त करने की ठानी थी। सरकार ने उनकी मंशा पूरी नहीं होने दी। इसके बाद भी राजब्बर सहित देहात मोर्चा व कई किसान संगठनों ने स्थानीय किसानों का साथ दिया और बार-बार आंदोलन किया।

इस आंदोलन से प्रभावित होकर तीन हजार किसानों का साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब बीस हजार किसानों ने अलग-अलग जगह धरना प्रदर्शन कर के दिया था।

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