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बिना भूमि हस्तांतरण के बना टैक्सी स्टैंड

नगर पंचायत नंदप्रयाग ने वन भूमि हस्तांतरित किए बिना ही 26.85 लाख रुपये का टैक्सी स्टैंड का निर्माण पूरा कर दिया। बदरीनाथ वन प्रभाग से प्राप्त अभिलेखों का हवाला देते हुए विभाग ने जानकारी दी है कि वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव उन्हें आया था, लेकिन प्रपत्रों की कमी से अभी तक लैंड ट्रांसफर नहीं की गई है। अब वन विभाग निर्माण एजेंसी पर जांच बैठाने की बात कर रहा है।

वर्ष 2006 में राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विकास को नंदप्रयाग में टैक्सी स्टैंड के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। निर्माण एजेंसी नगर पंचायत नंदप्रयाग ने वन भूमि हस्तांतरण किए बगैर ही टैक्सी स्टैंड का निर्माण शुरू कर दिया। आखिर बिना वन भूमि हस्तांतरण के टैक्सी स्टैंड का निर्माण कैसे हो गया, इस पर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।

उधर, नगर पंचायत शासनादेश का हवाला देकर टैक्सी स्टैंड के निर्माण को सही ठहरा रहा है। नगर पंचायत नंदप्रयाग के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जुलाई 2008 में जारी शासनादेशों के अनुसार नगर निकाय की भूमि पर पूर्ण रूप से निकायों को स्वामित्व प्राप्त हो गया है।

लेकिन अहम सवाल यह है कि वर्ष 2008 से पहले ही टैक्सी स्टैंड का निर्माण शुरू कर दिया गया था। ऐसे में यह नियम दो साल बाद मिले स्वामित्व के अधिकार पर कैसे लागू हुआ, लोगों की समझ से परे है।

यही नहीं, स्टैंड निर्माण में उपयोग में लाई गई सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिका के वरिष्ठ पार्षद विक्रम रौतेला ने इस टैक्सी स्टैंड की लागत और गुणवत्ता की तुलना पर जांच की मांग अधिकारियों से की है।

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