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निवेशक

अकसर आप लोग अखबारों में कई तरह के निवेशकों के बारे में पढ़ते रहते होंगे जैसे कि व्यक्तिगत निवेशक, सामाजिक संस्थाएं और विदेशी संस्थागत निवेशक।

विदेशी संस्थागत निवेशक : ये वे संस्थाएं होती हैं जिनकी रचना भारत में निवेश करने हेतु विदेश में की गई है। भारत में निवेश करने के लिए इन संस्थाओं को सेबी के साथ अपना पंजीकरण विदेशी संस्थागत निवेशक के रूप में करना होता है। सेबी के नियमों के मुताबिक इस तरह की संस्थाएं किसी भारतीय कंपनी के आईपीओ के कुल मूल्य के दस प्रतिशत से ज्यादा पर निवेश नहीं कर सकती।

व्यक्तिगत निवेशक : संख्या के हिसाब से कहा जाए, तो यह समूह शेयरधारकों का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। जहां तक सार्वजनिक निर्गम की बात है, तो व्यक्तिगत निवेशकों को दो भागों में बांटा जा सकता है। पहला वह निवेशक जो अधिकतम एक लाख रुपए के शेयर के लिए आवेदन कर सकते हैं और दूसरे वह निवेशक जो एक लाख या उससे अधिक मूल्य के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन निवेशकों को एचएनआई कहा जाता है। जहां तक आईपीओ की बात है, फुटकर निवेशकों का हिस्सा 35 और एचएनआई का हिस्सा 25 प्रतिशत होता है।

सामाजिक संस्थाएं : ये कई लोगों द्वारा आपस में मिलकर बनाई गई संस्थाएं होती है, लेकिन ये संस्थाएं अपने बनाए गए नियम कानूनों के तहत ही शेयर बाजार में निवेश कर सकती है।

वित्तीय संस्थाएं : वित्तीय संस्थाओं के अंतर्गत बैंक, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड आदि के लिए धन लगाने वाली संस्थाएं होती हैं। जहां तक निवेशकों के संदर्भ में कहें, तो प्राथमिक और द्वितीयक बाजार के ये सबसे बड़े निवेशक होते हैं।

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