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‘अपनी धुन’ छोड़ें

अपने कार्यस्थल पर अक्सर लोग अपना एक ‘कम्फर्ट ज़ोन’ (यानी वह माहौल, जिसमें हर काम को उनकी अपनी सुविधा और शैली में अंजाम दिया जा सके) बनाकर अपनी ही धुन में काम करते रहते हैं। वे इस बात से लगभग अनजान रहते हैं कि काम करने का कोई इससे भी बढ़िया और कारगर ढंग हो सकता है। ऐसी जड़ता दरअसल उनके अपने व्यक्तित्व और करियर के विकास में बाधक ही होती है, क्योंकि इससे उनका सीखने का क्रम खत्म हो जाता है और दिमाग पर ताले पड़ जाते हैं।

ज़ाहिर है, प्रतिस्पर्धा के इस दौर में किसी भी शख्स के लिए ऐसे खोल में बंद हो जाना अपने ही पांवों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। इसलिए अगर आपने भी खुद को ऐसे कंफर्ट ज़ोन में कैद कर रखा है, तो फौरन इससे निकलने का जतन कीजिए। तभी आपको अपनी क्षमताओं का पूरा अंदाजा लगेगा, और आप इनका पूरा फायदा उठाते हुए सफलता के शिखर पर पहुंच सकेंगे। 

आज़ादी की राहें
- अपनी आदतों को ठीक से समझों। देखें कि कोई भी काम करने का आपका तरीका सहज है या नहीं। अगर नहीं, तो इसे दुरुस्त करें।

- अन्य लोगों से बात करें। ये न समझें कि आप जो कर रहे हैं, वही ठीक है। सहकर्मियों और दूसरों की राय लेने या उनके अनुभव बांटने से आपको कई नई राहें मिलेंगी। तभी तो आप उनका इस्तेमाल करने को उद्यत होंगे।

- नई जिम्मेदारी लेने की आदत डालें। जो सीख लिया है, उसे एक ही ढर्रे में लंबे समय तक करते जाने में तो बोरियत ही बोरियत है। इसलिए नई, बड़ी जिम्मेदारी हाथ में लेकर नए जोश के साथ इसे बेहतरीन तरीके से अंजाम देने में जुटें। 

- चूंकि समय परिवर्तनशील है, इसलिए आप भी अपने काम करने के ढंग में समय-समय पर बदलाव लाते रहें। शुरू में दिक्कत होगी, लेकिन अंतत: आपको इसके मीठे फल ज़रूर मिलेंगे।

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