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सऊदी में लावारिस बनकर रहे अपने देश के हज यात्री

‘दामन जो आंसुओं से मेरा नम नहीं हुआ, दुनिया समझ रही है मुङो गम नहीं हुआ’ मशहूर शायरा शबीना अदीब की ये पंक्तियां शुक्रवार को लौटे हाजियों पर सटीक बैठती है। यात्रा से लौटे हाजियों के चेहरों पर जहां हाजी बनने की खुशी झलक रही थी, वहीं दिल में हज कमेटी की बदइंतजामी की कसक थी।

अगर हाजियों की मानें तो हज कमेटी के पदाधिकारियों ने तो उन्हें सऊदी ले जाकर लावारिस ही छोड़ दिया था। वहां की बदइंतजामी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सऊदी में रखे गए कम्पलेन रजिस्टर शिकायतों से भर गए हैं।

वैसे तो हज यात्रियों की मुसीबतों की शुरुआत इंटरनेशनल पासपोर्ट प्रकरण से ही हो गई थी, लेकिन उसके बाद यात्रा की बाकी औपचारिकताओं से लेकर सऊदी तक में हाजियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। हद तो तब हो गई जब वहां से लौटना तक हाजियों के लिए दुश्वार हो गया।

शुक्रवार सुबह मेरठ पहुंचे हाजियों ने दर्द-ए-दास्तां बयां करते हुए कहा ‘कभी सपने में नहीं सोचा था कि उस पाक जमीं पर जाकर उन्हें हज कमेटी के गैरजिम्मेदाराना रवैये का शिकार होना पड़ेगा’।

चौहट्टा क्षेत्र से हज करने गए इफ्तिखार अहमद ने बताया कि वे बिल्डिंग नं. 11 के मकतब न. 28 में ठहरे थे, लौटते समय वहां के कम्पलेन रजिस्टर में शिकायत दर्ज कराने तक की जगह नहीं थी। हाजी जीशान एवं हज्जन फिरोजा बेगम भी हज कमेटी के गैर जिम्मेदाराना रवैये का शिकार हुए।

इसके अलावा तिवारी कैम्पस से गए सरफराज एवं उनकी पत्नी, दारुदग्रान से गए नईम एवं उनकी पत्नी, इस्लामाबाद से गए आसिफ सहित कई हाजी जहां कमेटी को कोस रहे हैं, वहीं कुछ यह कहकर चुप हैं कि ‘कुछ मत पूछो, बस शुक्र है कि हम वापस आ गए’।

हाजियों का आरोप था कि फस्र्ट क्लास का किराया अदा करने के बाद भी थर्ड क्लास की सुविधाएं दी गईं, पहाड़ों पर रहने के लिए कमरे उपलब्ध कराए गये। जो कमरे उन्हें दिए गए थे, वहां बदहाल सफाई व्यवस्था, पीने के लिए पानी की किल्लत थी। इसके साथ ही जो बेडशीट कमरों में पहले दिन बिछायी गईं थीं, वे आखिर तक बिछी रहीं। हाजी इफ्तिखार अहमद ने तो यहां तक कहा कि अपने कमरों के शौचालय खुद साफ तक करने पड़े।

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  • Web Title:सऊदी में लावारिस बनकर रहे अपने देश के हज यात्री