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मैला ढोने वालों को 30-30 हजार

सिर पर मैला ढोने जैसे घृणित कार्य करने और अस्पृश्यता की जिन्दगी जीने वाले लोगों को अब किसी के समक्ष सहायता के लिए हाथ नहीं पसारना होगा। यही नहीं वे खुद अपने पैरों पर बगैर किसी के सहयोग के खड़े होंगे। राज्य सरकार ने इनके हाथों को मजबूत करने की मुकम्मल योजना तैयार की है।

इन्हें राज्य सरकार आर्थिक सहायता तो देगी ही समाज की मुख्य धारा में शामिल होने के लिए भी सहयोग देगी। विभाग के सचिव के.पी. रमैया ने बताया कि यह सहायता केन्द्रीय सहायता के अतिरिक्त होगा।

राज्य से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में नीतीश सरकार ने दूसरा कदम आगे बढ़ा दिया है। केन्द्र सरकार की उपेक्षा और बैंकों के असहयोग के बाद राज्य सरकार ने अपने स्तर से पहल शुरू कर दी है। राज्य सरकार सूबे के मैला ढोने वाले पांच हजार लोगों को 30-30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देगी।

यही नहीं इन्हें राजधानी पटना आमंत्रित कर समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के समक्ष यह सहायता राशि प्रदान की जाएगी। 10 दिसम्बर को श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में इन्हें सहायता राशि का चेक व ड्राफ्ट प्रदान किया जाएगा। अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग ने इस योजना का कार्यरूप तैयार कर लिया है। विभाग की इस योजना पर 15 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है।

इस समय राज्य में सिर पर मैला ढोने वाले लोगों की संख्या 10 हजार से अधिक है। पटना, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, पूर्णिया, गया, दरभंगा, मधुबनी, सारण, गोपालगंज, सीवान आदि जिलों में ऐसे लोगों की काफी संख्या है। हालांकि यह भी माना जाता है कि राज्य में इनकी वास्तविक संख्या इससे अधिक है।

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  • Web Title:मैला ढोने वालों को 30-30 हजार