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बुरी बीती बड़े बैनरों के साथ

बुरी बीती बड़े बैनरों के साथ

दर्शकों की नाक का सचमुच कोई जवाब नहीं। दूर से ही सूंघ लेते हैं कि किस फिल्म में कितना माल-मसाला होगा। तभी तो अक्टूबर के एकदम अंत में आईं सलमान खान, अजय देवगन, असिन जैसे सितारों वाली ‘लंदन ड्रीम्स’ और अमिताभ बच्चन की ‘अलादीन’ को ऐसी पटखनी दी कि बेचारी कराहती रह गईं। नवंबर में भी दर्शकों ने किसी के साथ रियायत नहीं बरती और जिस फिल्म में दम था, उसी के सिर पर सेहरा बांधा।

नवंबर की शुरुआत हुई राजकुमार संतोषी की ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ से। इस फिल्म में उन्होंने फिर दिखाया कि वह सचमुच हरफनमौला फिल्मकार हैं। रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ जैसे हरदिल अजीज सितारों की मौजूदगी वाली इस फिल्म ने अच्छा माल बटोरा।दर्शकों का प्यार पाकर यह फिल्म सुपरहिट रही। पहले हफ्ते में इसने हर सिनेमाघर से करीब 4 लाख 73 हजार रु. की औसत कलैक्शन की। वहीं दूसरे हफ्ते में भी इसने हर सिनेमा से औसतन सवा दो लाख रु. बटोरे। इसी के साथ आई मधुर भंडारकर की ‘जेल’ को हालांकि कुछ फिल्म समीक्षकों ने उम्दा की श्रेणी में रखा, लेकिन एक तो यह फिल्म कमजोर थी और दूसरे इसमें दर्शकों को खुद से बांधे रखने लायक कोई चीज नहीं थी, सो यह बहुत जल्दी नकार दी गई। इसके पहले सप्ताह की औसत कलैक्शन महज 1 लाख 27 हजार रु. ही रही। अगर कुछ प्रमुख शहरों में देखें तो इस फिल्म ने पहले हफ्ते में मुंबई में 25 प्रतिशत, दिल्ली में 20, नागपुर में 14, उज्जैन में 11, इलाहाबाद में 20, देहरादून में 21, अलीगढ़ में 14, मेरठ में 15 प्रतिशत का ही कारोबार किया। मधुर का इस बार अति आत्मविश्वास ले डूबा।

महेश भट्ट के कारखाने से निकली ‘तुम मिले’ में ऐसा कुछ नहीं था कि दर्शक इससे मिलने के लिए उतावले होते। वही दो-तीन जटिल किरदार और एक रूखी-सी सिचुएशन। बॉक्स-ऑफिस पर पहले सप्ताह में करीब एक लाख 57 हजार रु. की औसतन कमाई वाली इस फिल्म के साथ रिलीज हुई निर्माता आफताब शिवदासानी की ‘आओ विश करें’ ने तो डूबने से पहले पानी भी नहीं मांगा। यानी बुरी फिल्म बुरा नतीजा। इसी हफ्ते हॉलीवुड से आई और डब होकर रिलीज हुई ‘2012-प्रलय की शुरुआत’ ने इन फिल्मों को ही नहीं, बल्कि कई बड़ी फिल्मों को शर्मसार करते हुए ताबड़तोड़ बिजनेस किया। कोई पौने चार लाख रु. प्रति थिएटर की औसत से इस फिल्म ने भारत में करीब 19 करोड़ रु. पहले हफ्ते में बटोर लिये।  अब से दो साल बाद दुनिया की बर्बादी के भयंकर दृश्य दिखाती इस फिल्म ने लोगों के दिल दहला दिये।
 
तीसरे हफ्ते में करण जौहर के कैंप से आई ‘कुर्बान’ में हालांकि सैफ अली खान और करीना कपूर की रीयल लाइफ हॉट जोड़ी थी, लेकिन यह फिल्म ही इस मिजाज की नहीं थी कि इसे हर कोई देखने आता। हां, जो बात यह फिल्म कहना चाहती थी, वह कहने में इसके निर्देशक रेंजिल डिसिल्वा ने काफी ईमानदारी बरती और इसे एकदम से नकारा भी नहीं गया। इसके साथ रिलीज हुईं ‘मरेगा साला’ और ‘शाबाश यू कैन डू इट’ के तो कहीं नाम भी नहीं सुनाई दिए। नवंबर के आखिरी सप्ताह में वह फिल्म आई, जिसके आने से पहले ही उसका नाम हर किसी की जबान पर था। प्रियदर्शन जैसा निर्देशक और कलाकारों में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, कैटरीना कैफ, परेश रावल, नेहा धूपिया, समीरा रेड्डी, जॉनी लीवर आदि की मौजूदगी ने इसे जिस हॉट-केक का दर्जा दे दिया था, उसकी गर्मी इसके आते ही गायब हो गई। इसमें उतना दम नहीं था जितना सोचा गया था। लिहाजा यह फिल्म औसत तक ही  पहुंच पाई।   ‘निंजा एसेसिन’ को कहीं-कहीं पसंद किया गया।

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