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बॉक्स ऑफिस पर भी सिंह इज किंग

बॉक्स ऑफिस पर भी सिंह इज किंग

अब रणबीर कपूर की बारी है। आने वाली फिल्म ‘रॉकेट सिंह’ के जरिये उन्हें साबित करना है कि सेल्युलॉयड पर सिख किस हद तक किंग है। हालांकि अक्षय कुमार पहले ही फिल्म ‘सिंह इज किंग’ से यह साबित कर चुके हैं। अक्षय ही क्यों, फिल्म ‘गदर’ से इस ट्रैंड की शुरुआत करने वाले सनी देओल भी बॉक्स ऑफिस पर अपना लोहा मनवा चुके हैं, पर रणबीर की बात कुछ अलग है। चॉकलेटी इमेज के रणबीर युवतियों में खासे पॉपुलर हैं। हालिया हिट ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ की सफलता उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है। ‘वेकअप सिड’ में भी उनका ट्रैक रिकॉर्ड काबिले तारीफ रहा। अब रणबीर को इस साल की तीसरी हिट का इंतजार है। रणबीर को न केवल अपने गैटअप के साथ न्याय करना है, बल्कि सेल्समैन की उस छवि को भी नए अंदाज में पेश करना है, जिसे लेकर आमजान की राय एक दोयम दर्जे के पेशे की ओर इशारा करती है। वो बात दीगर है कि आज विभिन्न क्षेत्रों में मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव कहलाने वाले कर्मी कल के सेल्समैन ही हैं। 

फिल्म के प्रोमोज की अगर बात करें तो स्क्रीन पर रणबीर कपूर काफी क्यूट दिख रहे हैं, जो उनकी फीमेल फैनफेयरशिप के हिसाब से उनके पक्ष में जाता है। इस फिल्म का निर्माण यशराज बैनर ने किया है और निर्देशक हैं यश कैंप के चहेते शिमित अमीन, जिनके खाते में ‘चक दे इंडिया’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म है। शिमित ने रॉकेट सिंह के रूप में रणबीर को जो गैटअप दिया है, वह उन पर काफी फब भी रहा है। उसके साथ तैयार किया गया प्रोमो भी काफी दिलचस्प है। मसलन, फिल्म बनाई है तो बेचनी तो पड़ेगी, आप भी थोड़ी मेहनत कीजिए ना, सरीखे डायलॉग दर्शाते हैं कि एक सेल्समैन के रूप में उन्होंने रणबीर से काफी कुछ करवा लिया है।

पिछले कुछ वर्षो में सिल्वर स्क्रीन पर सिख किरदार, सिखों से प्रेरित या कहिये कि सिखों की छवि वाले किरदार एक हॉट केक के रूप में उभरे हैं। वास्तविकता यह भी है कि सिख किरदार बॉलीवुड अभिनेताओं को काफी रास आये हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है अक्षय कुमार। अनीस बज्मी की फिल्म ‘सिंह इज किंग’ से वह बॉक्स आफिस के किंग बन गये। यह बात दीगर है कि बाद में उनकी किसी फिल्म को ‘सिंह इज किंग’ जैसी सफलता नहीं मिली। शायद यही कारण है कि अक्षय एक बार फिर एक फिल्म में सिख बनने को तैयार हैं। निखिल आडवाणी की फिल्म ‘पटियाला हाउस’ में अक्षय कुमार एक बार फिर सिख चरित्र करने जा रहे हैं। इस फिल्म में उनकी नायिका अनुष्का शर्मा हैं। अब यह भविष्य बतायेगा कि लगातार बड़ी असफलताएं झेल चुके अक्षय कुमार को एक बार फिर सिंह ही किंग बनायेगा या नहीं।

अक्षय कुमार की ही तरह सैफ अली खान को भी सिख किरदार ने ही बड़ी सफलता दिलाई। उनकी इसी साल प्रदर्शित फिल्म ‘लव आजकल’ सुपर हिट फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में सैफ ने एक सिख का किरदार निभाया  है। दिलचस्प तथ्य है कि सैफ का यह किरदार ऋषि कपूर की कल्पना का ही नतीजा था, जिन्होंने खुद भी इसी फिल्म में एक सिख की भूमिका की है, पर हर कोई सैफ और अक्षय की तरह लकी नहीं होता। सिख किरदार का चोला ओढ़ने के लिए जब सलमान खान ने कमर कसी तो वह बॉक्स ऑफिस पर फिसल गये। फिल्म ‘हीरोज’ में उन्होंने प्रीति जिंटा के अपोजिट एक सिख सैनिक की भूमिका की थी। सलमान को इस गेटअप में देख कर खुद प्रीति जिंटा चौंक गयी थीं। शायद इसमें दोष सलमान का नहीं है, क्योंकि इस फिल्म के फ्लॉप होने के पीछे और भी कई कारण थे। सलमान खान की तरह संजय दत्त और अजय देवगन को भी सिख किरदार रास नहीं आया। संजय दत्त ‘सरहद पार’ में एक सिख की भूमिका में थे, पर यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई।

संजय की तरह अजय देवगन को भी यह गेटअप रास नहीं आया। उनकी राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘द लीजेंड आफ भगत सिंह’ फ्लॉप फिल्मों में गिनी जाती है। हालांकि अजय देवगन को भगत सिंह की भूमिका के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जरूर मिला था। 
 
देखा जाए तो सही मायने में सिर पर पग बांधना, सबसे ज्यादा सनी देओल को रास आया। उन्होंने ‘बॉर्डर’ में एक सिख आर्मी ऑफिसर की भूमिका की थी, पर जब सनी देओल ने ‘गदर-एक प्रेम कथा’ में पग बांधी तो तहलका मच गया। पाकिस्तान में घुस कर अपनी पत्नी और बच्चों को वापस लाने वाला यह सिख सिंह गजर्ना से पूरे हिन्दुस्तान में छा गया। यह फिल्म आज भी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार की जाती है। सनी की दो फिल्मों के बाद जब इंडस्ट्री ने उन्हें तीसरी बार सिख बनने का मौका दिया तो दर्शक इस किरदार के पीछे छिपी मुनाफे की मंशा को भांप गये और उन्होंने सनी की फिल्म  ‘जो बोले सो निहाल’ को भाव नहीं दिया। यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई।

इसके बाद सनी सिख के गैटअप में नजर नहीं आये। यह फिल्म सिख समुदाय के विरोध के कारण विवादित भी हुई और कई जगह बैन भी कर दी गयी। अतीत में जाएं तो साठ के दशक में सनी देओल के पिता धर्मेन्द्र ने भी सिख वेष धरा था। राजश्री की फिल्म ‘जीवन मृत्यु’ में धर्मेन्द्र सिख नहीं बने थे, मगर उन्होंने पुलिस से बचने के लिए फिल्म के एक सीन में सिख गेटअप जरूर धरा था। यह फिल्म सुपर हिट साबित हुई थी। अमिताभ बच्चन ने ‘मेजर साहब’ और ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ में सिख आर्मी ऑफिसर की भूमिकाएं की थीं, पर ये दोनों ही फिल्में फ्लॉप साबित हुईं। 

कुछ अन्य अभिनेताओं में कबीर बेदी की जेम्स बाण्ड सिरीज की फिल्म ‘ऑक्टोपसी’ का सिख चरित्र काफी फेमस है। इस किरदार से कबीर को उस जमाने में काफी ख्याति मिली थी। 1982 में प्रदर्शित गोविन्द निहलानी की फिल्म विजेता में कुणाल कपूर ने एक सिख युवक की भूमिका की थी। दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने दो फिल्मों तनूजा चन्द्रा की फिल्म ‘होप एंड लिटिल शुगर’ तथा ‘मि. भट्टी ऑन छुट्टी’ में सिख किरदार किया है, पर फिल्म ‘बेंट इट लाइक बेकहम’ में निभाया गया एक सिख पिता का उनका किरदार काफी चर्चा में रहा। बोमन ईरानी ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ में सिख बिल्डर बने थे। दक्षिण के सुपर स्टार कमल हासन ने भी दशावतार में एक सिख का किरदार किया है।

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