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उल्फा से बातचीत की तैयारी में जुटी असम सरकार

उल्फा से बातचीत की तैयारी में जुटी असम सरकार

असम सरकार ने उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) से बातचीत और उसके नेताओं को रिहा करने की मंशा जाहिर करते हुए कहा है कि संगठन को अपनी सत्ता की मांग छोड़नी होगी।

इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने तैयारियां भी शुरू कर दी है, जिसके तहत उन्होंने उल्फा के कमांडर इन चीफ परेश बरुआ को बातचीत की इस प्रक्रिया से अलग कर दिया है। उल्लेखनीय है कि परेश इस समझौते के खिलाफ हैं।

उल्फा के करीबी सूत्रों ने बताया कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों उल्फा को विभाजित करने में सफल हो गई हैं। उल्फा अध्यक्ष अरविंद राजखोवा की बांग्लादेश में गिरफ्तारी और अन्य प्रमुख नेताओं शशधर चौधरी और चित्रबोन हजारिका के पिछले महीने गिरफ्तार होने के बाद बातचीत की संभावनाएं नजर आ रही हैं।

मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि सरकार इस बातचीत को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी, लेकिन उल्फा को सत्ता की मांग छोड़कर अन्य मुद्दों पर बातचीत करनी होगी। उल्फा समस्या के जल्द ही समाप्त होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बातचीत जनता और राज्य दोनों के हित में है।

परेश के इसके खिलाफ होने के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा होता यदि वह भी बातचीत में शामिल होता, लेकिन उसके बिना भी इसे जारी रखा जाएगा। इस मुद्दे पर उल्फा में विभाजन पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक पक्ष अतिवादी है जबकि एक पक्ष बातचीत चाहता है। वार्ता के पहले के प्रयासों के असफल होने के जवाब में उन्होंने कहा कि अब स्थितियां बदल रहीं हैं। अरविंद सहित अन्य उग्रवादी बातचीत के पक्ष में हैं और आने वाले दिनों में इस दिशा में कुछ अच्छा होने की संभावना है।

गोगोई ने कहा कि वह इस बारे में बहुत कुछ नहीं बता सकते पर गृहमंत्री पी चिदंबरम भी इसके लिए प्रयासरत हैं। इस बीच उच्चस्तरीय आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अरविंद के साथ ही उल्फा के उप कमांडर इन चीफ राजू बरुआ की भी बांग्लादेश में गिरफ्तारी की सूचना मिली है और दोनों के जल्द ही भारत को सौंपे जाने की संभावना है। दूसरी ओर अरविंद ने भी परेश से वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।

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