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अभी और भी हैं सब्र के इम्तिहान

सहकारिता परिषद के उपाध्यक्ष पद पर हयात सिंह मेहरा को नामित करने के बावजूद मलाईदार कुर्सियों की लाइन में खड़े भाजपा नेताओं के सब्र का इम्तिहान अभी कुछ दिन और चलेगा। संगठन के चुनाव में उलझा भाजपा नेतृत्व किसी भी बखेड़े से बचने के लिए अभी दायित्व बांटने के मूड में नहीं है। पार्टी नेताओं के भारी दबाव के बावजूद दायित्वों की फाइल पर मुख्यमंत्री ने अपनी मंजूरी नहीं दी है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन चुनाव में पार्टी के कई नेताओं को एडजस्ट किया जाना है। संगठनात्मक दृष्टि से भाजपा ने अपने जिलों की संख्या 18 से बढ़ाकर 24 भी कर दी। मंडलों की संख्या छह दर्जन तक सीमित करते हुए उनका राजनीतिक कार्यक्षेत्र का दायरा बढ़ाकर पार्टी नेताओं को लुभाने की भी कोशिश की।  सूत्रों का कहना है कि अधिकतर पार्टी कार्यकर्ताओं को इन जिलों व मंडलों की जिम्मेदारी देकर संतुष्ट किया जाएगा।

शेष बचे नेताओं को सरकार महत्वपूर्ण दायित्वों  से नवाजेगी। पार्टी अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि 15 दिसम्बर तक संगठन चुनाव करा लिए जाएंगे। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री व संगठन दायित्व वितरण पर नए सिरे से विचार करेंगे। 15 दिसम्बर के बाद होने वाली महत्वपूर्ण बैठक की तिथि अभी तय नहीं की गयी है। चुफाल का कहना है कि सभी बड़े नेता चुनाव में व्यस्त हैं।

लिहाजा दायित्व वितरण के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो पा रही है। प्रदेश अध्यक्ष के बयान से यह साफ हो गया है कि दायित्व वितरण में अभी कुछ और समय लगेगा। हालांकि, पूर्व में चुफाल ने एक सप्ताह के अंदर जिम्मेदारी से नवाजने की बात कही थी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री निशंक सात विधायकों को संसदीय सचिव के पद से नवाजने के अलावा लगभग 25 अन्य लाल बत्तियों का बंटवारा कर चुके हैं। गुरुवार को उत्तराखंड राज्य सहकारी परिषद के गठन को बेसब्र पार्टी नेता एक उम्मीद की किरण अवश्य मानते हैं। लेकिन चुफाल की मानें तो पिटारा खुलने में अभी भी देरी है।

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