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जांच ने खोली कुंभ कार्यो की कलई

राज्य के नियोजन विभाग द्वारा कराई गई जांच में कुंभ कार्यो की कलई उतार कर रख दी है। जांच में एक भी कार्य ऐसा नहीं पाया गया, जिसका निर्माण मानकों के अनुरूप किया गया हो। ऋषिकेश के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर लक्सर के रेलवे ओवरव्रिज, सड़क और नालियों के निर्माण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां पाई गई हैं।

नियोजन विभाग ने रिपोर्ट का अध्ययन कर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के विभागों को इस कार्रवाई के लिए लिख दिया है। सरकार के निर्देश पर राज्य नियोजन विभाग ने टीयूवी साउथ एशिया नई दिल्ली व श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रीयल रिसर्च दिल्ली से कुंभ कार्यो की जांच सौंपी थी।

दोनों संस्थाओं ने पीडब्लूडी व सिंचाई विभाग से संबंधित कार्यो की जांच की थी। नियोजन विभाग को संस्थाओं द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि, 30 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की लागत से तैयार किए गए लक्सर रेलवे ओवर ब्रिज का सब-बेस में मानकों के अनुसार सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया।

इस कारण बेस धंस गया। अट्ठारह करोड़ से बनने वाले लगभग ग्यारह किमी. लंबे ओल्ड दिल्ली नीतिपास (ज्वालापुर-भूपतवाला मार्ग) के निर्माण में भी गड़बड़ी मिली है। हरिद्वार के चित्र टॉकीज के पास व आर्यनगर चौक समेत कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परतों में गड़बड़ी उजागर हुई है।

लीग्रांड होटल से बस स्टैंड तक चेकर्स टाइल्स की स्ट्रेंथ मानकों के अनुसार नहीं लगी है। सप्तऋषि पावनधाम मार्ग पर आरसीसी नाली कवर की मोटाई डेढ़ सौ एमएम के बजाय  पचास एमएम मिली है। कई रास्ते बनते ही धंस गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि, ऋषिकेश स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में आठ एमएम का सरिया गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरा। बैरागी कैंप घाट, मायापुर एस्केप चैनल से ईरीश सेतु तक घाट निर्माण, दक्ष मंदिर के पास का घाट निर्माण के कार्यो में भी मानकों की अनदेखी की गई।

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