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वेस्ट यूपी में भी कई हैं ‘पा’ जैसे

सिनेमा हॉलों में भले ही शुक्रवार से ‘पा’ की धूम मचेगी लेकिन फिलहाल तो आम लोगों से लेकर बड़े-बड़े डॉक्टरों के जेहन में भी पा की है गूंज है। मोटी किताबें और साइटों पर इससे जुड़ी जानकारियां ढूंढ़ी जा रही है कि कहीं  उनका ‘वो’ मरीज भी तो  पा  के जैसा ही नहीं था। डॉक्टरों की मानें तो डाउन सिंड्रोम और सिम्फ्रोसिनिया में भी कुछ लक्षण प्रोजेरिया से मिलते हैं।

समय से पहले लोग बूढ़े नजर आने लगते हैं या फिर शारीरिक और मानसिक विकास समान अनुपात में नहीं होता है। माना जाता है कि अस्सी लाख में एक बच्चों प्रोजेरिया के होने की संभावना है । इसके बावजूद  यूपी का पहला और देश का दूसरा केस मुरादाबाद में होने की संभावना है। मुरादाबाद के यश हॉस्पिटल और रिसर्च सेन्टर में ऐसे एक केस पर शेध चल रहा है। तत्काल वहां के डॉक्टरों ने इस संबंध में कुछ भी खुलास करने से बच रहे हैं।

मेरठ के एक प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डा. उमंग अरोड़ा ने मेरठ में भी इससे मिलते-जुलते मरीज होने की संभावना जतायी है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को आसानी से प्रोजेरिया कर मरीज करार नहीं दिया जा सकता है। इसकी जांच जैसी यहां कोई व्यवस्था भी नहीं है। सूत्रों के अनुसार मुरादाबाद वाली 14 वर्षीय लड़की पर गंभीर काम हो रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो कभी भी बिहार के छपरा के रामूल और अली हसन की तरह  इस लड़की की भी प्रोजेरिया के मरीज होने की पुष्टि हो सकती है।

दूसरी ओर डाउन सिंड्रोम के सिम्फोसिनिया भी इस श्रेणी की बीमारियों में रखी जाती है और इसे भी काफी रेयर माना जाता है। बीस से पचीस लाख में एक बच्चों में यह होता है। इस संबंध में डॉ. सीवी सिंह ने कहा कि इसमें प्रोजेरिया से भी आगे के कुछ लक्षण है। व्यक्ति अपनी उम्र से पंद्रह साल आगे तो चलता है मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। डाउन सिंड्रोम में भी सिर के बाल झड़ जाते हैं और आंखें बड़ी हो जाती है और चेहरे धंसे होते हैं। 

हालांकि प्रोजेरिया का सबसे बड़ा बड़ा लक्षण चेहरे का पक्षी जैसा होना होता है जो डाउन सिंड्रोम में नहीं होता है। डॉ. सिंह सहित कई अन्य डॉक्टरों ने बताया कि साल में मेरठ में पांच से दस मामले सिम्फोसिनिया के आ जाते हैं । इसके मरीज भी पा जैसे ही होते हैं और इसका भी इलाज अब तक सामने नहीं आया है। इधर पा फिल्म के बाद डॉक्टरों ने भी प्रोजेरिया पर अध्ययन शुरू कर दिया है।

बाल रोग विशेषज्ञ डा. विजय जायसवाल,डा. अजय गुप्ता सहित अन्य डॉक्टरों ने बताया कि इस फिल्म के बाद काफी संख्या में लोग इसके बारे में उनलोगों से पूछताछ कर रहे हैं। मेडिकल साइंस की किताबों में भी इसे रेयर बताते हुए काफी कम सामग्री दी गयी है।

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