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जेलों में बंदी आध्यात्मिक, शैक्षिक और खेलकूद गतिविधियों में मशगूल

‘कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ’ ये चंद लाइनें परिक्षेत्र की जेलों में कैद बंदियों पर चरितार्थ हो रही हैं। लंबे समय तक प्रदेश की बवाली जेलों में शुमार परिक्षेत्र की जेलों में बदलाव की ऐसी बयार बही कि मानो जेलों में बंदी नहीं बल्कि साधु संत रहने लगे हैं।

छापे में न तो मोबाइल बरामद होता है और न ही आपत्तिजनक वस्तु, न तो रोज-रोज मारपीट की खबर आती है और न ही जेल अफसरों-कर्मचारियों को धमकी की खबरें। जिस तरह परिक्षेत्र की जेलों में बंदी आध्यात्मिक साधना, शैक्षिक और खेलकूद गतिविधियों के साथ ही रचनात्मक कार्यो में व्यस्त रहते हैं। उससे बंदियों में काव्य लेखन, चित्रकला और निबंध लेखन का जो जुनून देखने को मिल रहा है।

उसे देखकर तो यहीं कहा जा सकता है कि वजूद को कैद रखा जा सकता है, लेकिन जुनून को नहीं। यह संभव हो सका है आईजी जेल सुलखान की पहल पर। जेलों में इसी माह कार्यक्रम शुरू किये और बंदियों के हिस्ट्री टिकट पर लाल स्याही से उनकी रुचि के मुताबिक कार्यक्रमों में ली जा रही हिस्सेदारी को अंकित किया। इसके साथ ही बंदियों को उनकी रुचि और शारीरिक क्षमता के मुताबिक शारीरिक व्यायाम और अन्य कार्यों में लगाया।

खास बात यह है कि बंदी खुद को शैक्षिक और खेल गतिविधियों में शामिल होने के साथ ही रचनात्मक कार्यो में खुद को व्यस्त किये हैं। आईजी जेल सुलखान सिंह और डीआईजी जेल एके पंडा का कहना है कि देर-सवेर इस मुहिम का सार्थक परिणाम सामने आएगा। मेरठ जेल में आध्यात्मिक साधना में आर्ट ऑफ लिविंग में एक सौ, विपश्यना में 150, योग सत्संग में 40, शांति कुंज हरिद्वार के कार्यक्रमों में 130, सहज योग रामचंद्र मिशन कार्यक्रम में 125, प्रजापति ब्रह्मकुमारी संस्था के कार्यक्रमों में 400 बंदी भाग ले रहे हैं।

इसके अलावा खेलकूद गतिविधियों में प्रतिदिन 2150 बंदी शिरकत करते हैं। जबकि उत्पादक कार्य में 437 और रचनात्मक कार्य (चित्रकला, काव्य लेखन, निबंध लेखन, शैक्षिक गतिविधियों) में एक हजार बंदी शिरकत कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर जेल में आध्यात्मिक साधना के तहत आर्ट ऑफ लिविंग में 42, विपश्यना में एक, योग सत्संग में 36, शांति कुंज हरिद्वार के कार्यक्रमों में 28, सहजयोग रामचंद्र मिशन के कार्यक्रम में नौ तथा भजन-कीर्तन में 41 बंदी भाग ले रहे हैं। इसके अलावा 393 बंदी खेलकूद गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।

उत्पादकता कार्यो में 63, रचनात्मक कार्यो में 291 बंदी भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही करीब 250 बंदी शैक्षिक गतिविधियों में व्यस्त हैं। इसी तरह परिक्षेत्र की अन्य जेलों देवबंद, सहारनपुर, गाजियाबाद में भी बंदी विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।

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  • Web Title:वजूद कैद रखा जा सकता है जुनून नहीं