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मिलों में इस बार कम होगा 50 फीसदी उत्पादन

यदि आप सस्ती चीनी खाने की सोच रहे हैं, तो उसे दिमाग से निकाल दीजिए। सस्ती चीनी के दिन लद चुके हैं। अब बदलते वक्त के साथ जमाना आ गया है महंगाई का। जिस प्रकार लगातार गन्ने के दाम बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार चीनी के दाम भी आसमां छू रहे हैं। जिस तरह से चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई हो रहा है, उससे साफ स्पष्ट है कि इस बार 50 फीसदी कम चीनी का उत्पादन होगा।

वेस्ट यूपी में किसानों की लाइफलाइन गन्ने की फसल से उसी के दाताओं ने इस कदर मुंह मोड़ा है, कि वह अब दोबारा इस खेती को करना नहीं चाहते। पिछले दो वर्ष में जनपद में जहां तीस फीसदी गन्ना क्षेत्रफल कम हुआ है, वहीं चारों चीनी मिलों में करीब पांच लाख चीनी के बोरों का उत्पादन घट गया।

कारण साफ रहा, किसानों को समय पर उनकी फसल का भाव नहीं मिला। फिलवक्त की बात करें तो चीनी मिलों को पर्याप्त मात्र में गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इससे साफ स्पष्ट हो रहा है कि इस बार मिलों में चीनी उत्पादन काफी कम होगा। चीनी की उपलब्धता कम होने से चीनी के दाम पूरे 50 रुपये किलो हो जाएंगे।

अब लग रहा है कि भविष्य में चीनी के दाम कम नहीं हो पाएंगे। इसलिए अच्छा है कि लोग महंगी चीनी खाने की आदत डाल लें। फिलहाल चीनी के थोक भाव 3530 रुपये कुंतल हैं। रिटेल बाजार में चीनी 37 रुपये किलो बिक रही है। आर्थिक जानकारों की मानें तो चीनी के दामों में कमी की दूर-दूर तक कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही।

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