DA Image
21 सितम्बर, 2020|5:46|IST

अगली स्टोरी

धान खरीद पर सुस्ती हावी

बिहार में धान की सरकारी खरीद की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अभियान की शुरूआत 1 नवम्बर को ही हुई थी, लेकिन अब तक मात्र 256 टन ही धान खरीदा जा सका है।

यह खरीद भी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के कारण संभव हो सकी है। वरना राज्य सरकार की एजेंसियां तो अपनी दुकानें भी ठीक से नहीं सजा पाई हैं। फिर भी बिहार सरकार को लक्ष्य हासिल हो जाने की उम्मीद है। खरीफ मौसम 2009-10 में सात लाख टन ही धान की खरीद होनी है। सूखे की मार की वजह से इस वर्ष सूखे की मार की वजह से बिहार में मात्र 25.57 लाख टन धान के उत्पादन का अनुमान है।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का मानना है कि अगले सप्ताह से अभियान जोर पकड़ लेगा। लिहाजा सभी एजेंसियों को खरीद केन्द्रों पर कर्मचारियों की तैनाती करते हुए धान की खरीद में तेजी लाने का फरमान जारी कर दिया गया है। पैक्स-कृषक सहकारी समितियों को 2.25 लाख टन, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को दो लाख टन, बिस्कोमान और नेफेड को एक-एक लाख टन जबकि राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) को कम से कम 75 हजार टन धान खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गत वर्ष 12.5 लाख टन लक्ष्य की तुलना में 12.35 लाख टन धान खरीदा गया था। प्रति क्विंटल सामान्य और ‘ए’ ग्रेड के धान की बिक्री पर किसानों को क्रमशः 950 और 980 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा राज्य सरकार और केन्द्र सरकार प्रति क्विंटल धान पर 50-50 रुपए बोनस भी दे रही है। सबसे सबसे अधिक 98000 टन धान रोहतास में जबकि सबसे कम सात-सात सौ टन धान किशनगंज और कटिहार में खरीदा जाएगा।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:धान खरीद पर सुस्ती हावी