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वेतन और जवाबदेही

मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों के वेतन या भत्ते बढ़ाने की जब भी चर्चा होती है तो हर ओर से आलोचना की बौछार शुरू हो जाती है। इसकी वजह यह नहीं है कि हमारे देश में इन लोगों के वेतन और भत्ते बहुत ज्यादा हैं, हकीकत यह है कि जिस जिम्मेदारी का काम वे करते हैं उसके अनुपात में वे बहुत कम पैसा पाते हैं। आलोचना की मुख्य वजह यह आम धारणा है कि मंत्री और जनप्रतिनिधि अपना काम ठीक से नहीं करते और दूसरी यह धारणा कि आम तौर पर राजनेता भ्रष्ट होते हैं।

इन दोनों धारणाओं में काफी कुछ तथ्य है, लेकिन इस समस्या का हल क्या है? यह साफ है कि हम सांसदों को इसलिए नहीं चुनते कि वे संसद में या तो अनुपस्थित रहें या शोर मचाएं और जनप्रतिनिधि मंत्री इसलिए नहीं बनते कि सिर्फ अपने कुनबे का भला करें। मंत्रिपद पर बैठा हुआ एक जनप्रतिनिधि समाज के हक में बड़े फैसले कर सकता है और देश चलाने के तौर-तरीकों में गहरा असर छोड़ सकता है। लेकिन अक्सर हम मंत्रियों की अकर्मण्यता और घोटालों की चर्चा सुनते हैं और वह हम में उनके प्रति अविश्वास और संदेह पैदा कर देती है।        

इसका अर्थ यह नहीं है कि मंत्रियों के वेतन उनके मातहतों के वेतन से भी कम हों। जरूरी यह है कि उनके वेतन तर्कसंगत हों लेकिन उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। अगर मंत्रियों के वेतन कम हैं तो इससे भ्रष्ट मंत्रियों को कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन जो मंत्री ईमानदार हैं, जो गलत रास्तों से पैसा नहीं कमाते, उन्हें दिक्कत होगी।
  
जो नेता भ्रष्टाचार से पैसा कमा रहे हैं, वे शायद इस मुद्दे को न उठाना चाहें और कुछ ईमानदार और आदर्शवादी नेता भी वेतन कम होने को सही ठहरा सकते हैं लेकिन व्यावहारिकता का तकाजा यही है कि चाहे मंत्री हों या जनप्रतिनिधि उन्हें सही वेतन और जरूरी सुविधाएं मिलें और वे अपने रसूख का या वीआईपी होने का फायदा उठाकर जो गैरजरूरी और नाजायज सुविधाएं या पैसा पा लेते हैं, वह नहीं मिले।

इतना पैसा उन्हें मिलना चाहिए कि वे कभी-कभार किसी अच्छे रेस्तरां में खाना खा सकें या क्रिकेट मैच का टिकट खरीद सकें, लेकिन यह सुविधा उन्हें कतई नहीं मिलनी चाहिए कि वे मुफ्त में यह सब करें। और सबसे बड़ी बात, वे अपना काम पूरी मुस्तैदी के साथ कर रहे हों, तो फिर उन्हें ठीक-ठाक वेतन देने में क्या गुरेज हो सकता है। आखिरकार हमारे लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की महत्वपूर्ण जगह है और लोकतंत्र के सम्मान के लिए जरूरी है कि उन्हें सम्मानजनक वेतन और भत्ते मिलें।

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