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बुन्देलखण्ड के लिए घोषित पैकेज नाकाफी : सीएम

मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गुरुवार को पत्र लिखकर बुन्देलखण्ड के लिए घोषित किए पैकेज को अपर्याप्त बताया है। उन्होंने कहा है कि तीन साल के लिए केवल 1595 करोड़ रूपए की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता स्वीकृत की गई है।

यानी यूपी को हर साल सिर्फ 550 करोड़ रूपए से भी कम की धनराशि प्राप्त होगी। शेष धनराशि पहले से चल रहीं केन्द्रीय योजनाओं से कनवर्जन करते हुए उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा है कि इस पैकेज से बुन्देलखण्ड की जनता को काफी निराशा हुई है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री को अपने स्तर से केन्द्रीय योजना आयोग को निर्देशित करना चाहिए।  

सरकारी प्रवक्ता ने यहाँ बताया कि मई 2007 में सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री से भेंट कर बुन्देलखण्ड क्षेत्र व प्रदेश के समग्र विकास के लिए 80 हजार करोड़ रूपए के विशेष पैकेज की माँग की थी।   लेकिन केन्द्र सरकार ने 20 नवम्बर 2009 को यूपी व मध्य प्रदेश में आने वाले बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए केवल 7266 करोड़ रूपए का पैकेज तीन वर्षों के लिए स्वीकृत किया है, जिसमें से यूपी को सालाना सिर्फ 550 करोड़ रूपए मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने पत्र में प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया है कि केन्द्र की ओर से घोषित पैकेज चूँकि वर्ष 2009-10 से लागू होगा लिहाजा इस वित्तीय वर्ष की सीमित अवधि को देखते हुए नेशनल रेनफेड एरिया अथारिटी द्वारा प्रोजेक्ट्स के परीक्षण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। सीधे राज्य को ही स्वीकृति का अधिकार दे दिया जाए।

बुन्देलखण्ड क्षेत्र को पिछड़ेपन के मकड़जाल से निकालने लिए केन्द्र को ठोस व प्रभावी प्रयास करना चाहिए। बुन्देलखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियाँ उन अन्य राज्यों जैसी है जिन्हें स्पेशल एरिया इन्सेन्टिव पैकेज स्वीकृत किया गया है। इसके तहत केन्द्रीय उत्पाद शुल्क व आय कर में छूट दी गई है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए ताकि यहाँ औद्योगिक विकास हो।

सुश्री मायावती ने प्रधानमंत्री को पूर्व में लिखे गए अपने पत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि प्रदेश के सीमित संसाधनों के मद्देनजर बुन्देलखण्ड के समग्र विकास के लिए कृषि, उद्योग व सर्विस सेक्टर में केन्द्र की ओर से  बड़े विनियोजन की जरूरत है।

इस क्षेत्र में सेन्ट्रल रेलवे कोच फैक्ट्री, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की शाखा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मासूटिकल एजूकेशन एण्ड रिसर्च, नेशनल ऑटोमोबाइल टेस्टिंग एण्ड रिसर्च इंफ्रास्ट्रर, अखिल भारतीय आयरुविज्ञान संस्थान के समकक्ष परियोजनाएँ स्थापित की जाएँ।

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