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स्कूलों के पास शराब दुकानों पर हाईकोर्ट सख्त

शहर के रिहायसी इलाकों और प्राइवेट शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास शराब की दुकान खोले जाने पर पटना हाईकोर्ट ने अपनी नाराजगी जताई है। अदालत ने ऐसे इलाकों में खोली गई दुकानों को बंद करने के लिए वकीलों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी शराब दुकान के आस-पास रहने वाले लोगों सहित किसी को हुई परेशानियों के बारे में जांच कर अपना रिपोर्ट पेश करेगी। उसके बाद अदालत अपना फैसला देगी।


गुरुवार को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह तथा न्यायमूर्ति श्याम किशोर शर्मा की खण्डपीठ ने दो अलग-अलग लोकहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि उत्पाद कानून की धारा 30 से 35 तक का पालन सरकार खुद नहीं करती है। यही नहीं नियम 48 के तहत प्राप्त आपत्ति पर बिना विचार किए दुकानों को लाइसेंस जारी कर देती है। सरकार शराब के दुकानदारों को बचाने के लिए उनके पक्ष में हलफनामा दायर की है।

राज्य सरकार का बचाव करते हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने अदालत को बताया कि नियम 47 के तहत मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के पचास मीटर के दायरे में शराब पिलाने का लाइसेंस नहीं देना है। उनका कहना था कि रिहायसी इलाके में लाइसेंस देने से रोकने का कानून नहीं है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मान्यता प्राप्त तथा सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के अलावा प्राइवेट कोचिंग संस्थान तथा रिहायती इलाका में शराब दुकान का लाइसेंस नहीं दिया सकता। अदालत ने अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह, सिद्धार्थ प्रसाद तथा अमिका कुणाल को जांच का काम सौंपा है। अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

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