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चीनी मिलों के चक्कों ने नही पकड़ी रफ्तार

गन्ना का पेराई सत्र शुरू हो चुका है लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में अब तक गन्ना किसान उहापोह में हैं इस कारण मिलों तक पर्याप्त मात्र गन्ना नहीं पहुँच पा रहा है। फिलहाल चीनी मिलों के सुचारू रुप से चलने की संभावना नहीं दिखाई दे रही हैं।
बस्ती और संतकबीर नगर की पाँच चीनी मिलों के एक सप्ताह तक चलने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। तीन चीनी मिलों ने बाकायदा हवन-पूजन कर पेराई सत्र के शुभारम्भ की घोषणा तो कर दी है, लेकिन मिलों का पहिया ठप पड़ा है। किसी के पास चार सौ तो किसी के पास छह सौ कुन्तल गन्ना ही पहुँचा है। यह गन्ना भी किसानों के उहापोह में रहने के कारण ही मिल तक पहुँच पाया है। चीनी मिल अधिकारी 200 रुपया प्रति कुन्तल गन्ना मूल्य देने की बात कर रहे हैं तो किसान अभी भी 230 रुपया पाने के लिए डटे हुए हैं।

सुलतानपुर किसान सहकारी चीनी मिल को वर्तमान पेराई सत्र के लिए 12 लाख कुन्तल गन्ने की पेराई कर एक लाख कुन्तल स्टैंडर्ड चीनी के उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। चीनी मिल को चालू हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन अब भी चीनी मिल गेट पर गन्ने से लदी ट्रालियों व ट्रकों की संख्या कम ही दिखाई दे रही हैं।

चीनी मिल की प्रतिदिन 12 हजार कुन्तल गन्ने की पेराई क्षमता है लेकिन नौ से 10 हजार कुन्तल गन्ने की पेराई के बाद मिल के पहिए ‘नो केन’ की स्थिति में खड़े हो जाते हैं। यह स्थिति सिर्फ इसी कारण से बनी है कि गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान व पर्ची समय से नहीं मिल पाती है। जिसकी वजह से किसानों का रुझान गन्ने की बजाए अन्य नकदी फसलों की ओर बढ़ा है।

फैजाबाद गन्ना मूल्य का मुद्दा किसानों के बीच अब ठंडा पड़ा चुका है। इसके बावजूद चीनी मिलों का चक्का पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सका है। फैजाबाद  के मसौधा बाजार में स्थित के.एम. शुगर मिल में मुहूर्त हो जाने के चार दिन बाद पेराई शुरू हुई लेकिन संयंत्र बीच में बन्द भी करना पड़ गया।

मसौधा चीनी मिल के महाप्रबंधक बी.एन. मिश्र कहते हैं कि के.एम. शुगर मिल की क्षमता 80 हजार कुंतल रोज गन्ना पेराई कराने की है लेकिन पर्याप्त मात्र में मिल को गन्ना अभी नहीं मिल पा रहा है।

27 नवम्बर से तीन दिसम्बर तक इस मिल में कुल एक लाख 65 हजार कुंतल गन्ना पेरा गया है। गुरुवार को उपलब्ध रहे 35,700 कुन्तल गन्ने की पेराई कर प्लांट बंद कर देना पड़ा। बहराइच  में चीनी उद्योग दम तोड़ता नजर आ रहा है।

नवम्बर माह के मध्य से ही धुँआ उगलने वाली चीनी मिल की चिमनियाँ अभी सूनी हैं। परसेंडी सुगर मिल में 02 दिसम्बर को पेराई सत्र का मुहुर्त तो कर दिया गया लेकिन गन्ने की आमद कम होने से पेराई शुरू नहीं हो सकी है। वहीं जरवलरोड चीनी मिल में तो अभी पेराई सत्र ही नहीं शुरू हो पाया है। जबकि पिछले साल 15 साल से पेराई शुरू  हो गई थी।

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