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गठिया और योग

गाउट गंभीर तथा तीक्ष्ण गठिया का ही विशेष रूप है जो मुख्यतया भोजन की गड़बड़ी से ही उत्पन्न होता है। गाउट से अधिकतर वे ही व्यक्ति पीड़ित होते हैं जो भोजन में अधिक मात्र में प्रोटीन (विशेषकर मांस) लेते हैं। प्रोटीन के अत्यधिक सेवन से शरीर में यूरिक एसिड की मात्र बढ़ जाती है-जो जोड़ों को क्षतिग्रस्त कर देता है। योग इसके निदान में बहुत प्रभावकारी है। यहां पर इस हेतु कुछ प्रमुख यौगिक टिप्स प्रस्तुत की जा रही है।

आसन : गंभीर अवस्था में आसनों के अभ्यास के पूर्व रोगी को अपने हाथ-पैर ठंडे पानी तथा गर्म पानी में नमक घोलकर उसमें डुबाकर रखना चाहिए ताकि रोगग्रस्त अंगों में आराम मिलता जाए। शरीर के सभी जोड़ों का सूक्ष्म व्यायाम एवं पवनमुक्तासन का यथाशीघ्र अभ्यास करना चाहिए। इसके पश्चात् अभ्यास में ताड़ासन, जानुशिरासन, मार्जारिआसन, व्याघ्रासन, आकर्ण धनुरासन आदि जोड़ देना चाहिए। यहां पर आकर्ण धनुरासन के अभ्यास की विधि प्रस्तुत है -

दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठें। बाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसके पंजे को बांए हाथ से पकड़ते हुए सिर के पास लाइए। दाएं हाथ से दाएं पैर के पंजे को पकड़ने का प्रयास करें। शरीर को आगे की ओर थोड़ा झुकाएं किंतु रीढ़ को बिल्कुल सीधा रखिए। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आइए। यही क्रिया दूसरी तरफ भी कीजिए।

योगनिद्रा एवं ध्यान : गाउट का एक प्रमुख कारण विचारों का दमन, तनाव, अवसाद, तथा मन का शोक एवं चिंताग्रस्त रहना है। योगनिद्रा एवं ध्यान के अभ्यास से उपयरुक्त मनोभावों पर आसानी से विजय प्राप्त हो जाती है।

आहार : भोजन में संतुलित, सुपाच्य, चोकरयुक्त आटे की रोटी, छिलके वाली मूंग की दाल खाएं। हरी सब्जियों में लौकी, तुरई, पत्तागोभी, टमाटर, परवल, गाजर, अदरक आदि का सेवन करें। खरबूजा, तरबूज, पपीता, खीरा अधिक खाएं। अंकुरित अनाज, बार्लेवाटर लें।

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