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सीलिंग का जिन्न फिर बाहर आया

शहर में सीलिंग का जिन्न फिर बाहर आ गया है। विकास शुल्क, पानी बिल व हाउस टैक्स न देने वालों की यूनिट (मकान, दुकान, कमर्शियल स्थल, उद्योग) सील की जाएंगी। इसको लेकर नगर निगम बकायादारों का चिट्ठा तैयार कर रहा है। घर-घर जाकर निगम के कर्मचारी वसूली करेंगे। कानूनी लिहाज से खुद को मजबूत करने के लिए निगम बकायादारों का रोजनामचा तैयार करेगा। जिसमें उनसे बातचीत का विवरण दर्शाया जाएगा। नगर निगमायुक्त सीआर राणा ने क्लर्क से लेकर जेडटीओ तक के अफसरों की जवाबदेही तय की है।


डूबते को तिनके का सहारा की तरह आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम के सामने रिकवरी एक मात्र सहारा बचा है। कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना तक यहां मुश्किल हो रहा है। सरकार से भी फिलहाल ग्रांट की उम्मीद कम हैं। ऐसे में निगम ने दोबारा बकाया वसूली पर जोर देने का फैसला किया है। रिकवरी सेल मजबूत करने के लिए लिपिक व इंस्पेक्टर को 20 हजार रुपये तक के बकायादारों की रोजाना 20 यूनिटों में जाना तय किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट जेडटीओ को रोजाना देनी होगी। दूसरी कड़ी में एक लाख रुपये तक के बकायादारों के 10 यूनिट में जेडटीओ जाकर रोजाना वसूली करेंगे। उनको एसटीओ को रिपोर्ट करनी होगी। एसटीओ को समूचे शहर की रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपनी होगी। इस प्रक्रिया में सभी की जवाबदेही तय की जाएगी। कर्मचारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। आला अफसरों को आशंका है कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की वजह से अपेक्षित रिकवरी नहीं हो पा रही है।


बहरहाल, किस व्यक्ति के पास गए, किस समय व कहां गए, टेलीफोन-मोबाइल सहित उसका विवरण, कितना पैस उस पर बकाया है, क्या प्रगति रही? आदि बिंदुओं पर एक रजिस्टर में रिपोर्ट दर्ज करनी होगी। रिकवरी टीम चाहे तो बकायादार को एक समय तक मोहल्लत दे सकेगी। लेकिन इसके बाद भी पैसे नहीं दिए तो उसका मकान सील किया जाएगा। सवा दो लाख यूनिटों में काफी ऐसी यूनिट हैं जिन पर आज भी निगम का करीब 40 करोड़ रुपये बकाया है।

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