class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कभी पुलिस का फालोवर था नक्सली रामवृक्ष कोल

50 हजार का इनामी नक्सली कमांडर रामवृक्ष कोल कभी पुलिस का फालोवर था। वह वन विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर गांव में ही उपजे विवाद के कारण नक्सली बना था। नौगढ़ क्षेत्र के लौआरी गांव में लगभग 52 बीघा जमीन को लेकर गांव के ही लोगों से विवाद चला आ रहा था।

वह उस जमीन पर जहां अपने कब्जे का दावा करता था, वहीं गांव के ही सीता राम कोल के परिवार के लोगों का उसपर दावा था। इसी बीच 2002 में उसने नक्सलियों से हाथ मिलाकर गांव के तीन व्यक्तियों की बहुत ही निर्दयतापूर्वक कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद जो भी नक्सली घटनाएं होती गयीं, उन सबमें वह अपने क्रूरता का परिचय देता गया।

18 नवम्बर 2004 की रात में मझगाईं वन चौकी पर बम विस्फोट और जबरदस्त फायरिंग नक्सलियों ने की थी, जिसमें दो पुलिस कर्मियों और एक वन कर्मी की मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद सुबह जब कांबिंग करने पुलिस और पीएसी की पार्टी हिनौत घाट की तरफ 19 नवम्बर को जा रही थी, तब उसने नक्सलियों के साथ पीएसी की ट्रक को बम विस्फोट करके उड़ाने में अहम् भूमिका निभायी थी।

पुलिस की कार्यप्रणाली से वह पहले से ही परिचित था। कारण कि, चंद्रप्रभा पुलिस चौकी और नौगढ़ थाने पर यह पुलिस के फालोवर के रूप में काम कर चुका था। फालोवर के रूप में काम करते हुए उसने पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली समझ ली थी। बाद में जब वह नक्सली गिरोह में शामिल हो गया, तो उसे पुलिस के हर कदम का पूर्वानुमान लगाने में जरा भी देर नहीं लगती थी। यही कारण था कि, नक्सली 2004 तक एक के बाद एक वारदातें करते गये और पुलिस को बहुत कम सफलता मिल पायी।

अब उसकी मौत की पुष्टि होने के बाद उससे जुड़े मामले एक-एक करके उभरने लगे हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा है कि, कोल की चरित्रहीनता ने ही उसकी जान ले ली। पहले भी नक्सली गुटों के लोगों ने कई बार इसपर आपत्ति भी जताई थी। लेकिन उसकी क्रूरता के कारण गुट के लोग बहुत मुखर होकर कुछ नहीं कह पाते थे। अब उसके मारे जाने के बाद कहीं न कहीं उसके इसी दोष को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कभी पुलिस का फालोवर था नक्सली रामवृक्ष कोल