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हाईटेक सिटी बना नशीले पदार्थों की मंडी

यूपी के शो विंडो कहे जाने वाले औद्योगिक नगरी धीरे-धीरे नशीले पदार्थो की तस्करी का अड्डा बनता जा रहा है। सेक्टरों से सटे झुग्गी-झोपड़ी और गांवों में तेजी से धंधा फलफूल रहा है। निर्माणाधीन भवनों में काम करने वाले मजदूर, रिक्शा चालक तथा एक्सपोर्ट कंपनियों में नौकरी करने वाले लोग इसके शिकार हो रहे हैं। जिले में करीब आधा दर्जन ऐसे तस्कर हैं जो बड़ी तादात में माल बाहर से मंगाकर नोएडा समेत पूरे एनसीआर में सप्लाई कर रहे हैं। पिछले दिनों नोएडा पुलिस ने दो बड़े गैंग के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक तत्करों को गिरफ्तार कर चुकी है, बावजूद धंधा बदस्तूर जारी है। खास बात यह है कि मादक पदार्थ उड़ीसा और पूर्वाचल के जिलो  से लग्जरी कार व ट्रेनों के माध्यम से लाई जा रही है। तीन दिन पहले सेक्टर 62 फोर्टिस चौराहे के पास बैग से चालिस किलो गांजा मिलना इसका जीता जागता उदाहरण है।


क्या हैं आंकड़े- जिले में अब तक मादक तस्करी के 160 मामले आ चुके हैं जबकि वर्ष 2008 में 206 तथा 2007 में 164 मामले प्रकाश में आये थे। 22 जून  को कोतवाली सेक्टर 20 पुलिस ने गिरोह के करीब 11 सदस्यों को गिरफ्तार कर एक कुंतल गांजा बरामद किया था, जो उड़ीसा से लाया जा रहा था। इस गैंग में तीन महिलाएं और एक रिटायर्ड फौजी भी शामिल था। गैंग ने इस बात का खुलासा किया था कि इसकी सप्लाई नोएडा के अतिरिक्त गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ व दिल्ली में भी की जाती है।


थाना                      सामने आये कुल मामले
कोतवाली सेक्टर 20                        62
कोतवाली सेक्टर 24                        13
कोतवाली सेक्टर 39                        09
कोतवाली सेक्टर 49                        12
कोतवाली सेक्टर 58                        21
कोतवाली फेज टू                            23

कौन हैं बड़े सप्लायर, कहां होती है सप्लाई- जिले में नशीले पदार्थाें का सबसे बड़ा सप्लायर सिकंदर, निकेश और तारा हैं जो सेक्टर 8,9 की झुग्गियों में रहकर धंधा चलाते हैं। इन झुग्गियों के अतिरिक्त सेक्टर 16 झुग्गी, हरौला, विशनपुरा, खोड़ा कालोनी, ममूरा, बहलोलपुर, वाजिदपुर, भंगेल, ककराला, होशियारपुर आदि गांवों तथा निर्माणाधीन भवनों की साइट पर सप्लाई होती है। इसके अतिरिक्त गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली व बुलंदशहर में मलिन बस्तियों में भी सप्लाई की जा रही है। यहां रहने वाले मजदूर और रिक्शेवाले इनका शिकार हो रहे हैं। नोएडा में हर महीने एक कुंतल से अधिक की खपत होती है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 35 से 40 हजार मजदूर व रिक्शेवाले नशीले पदार्थो के सेवन के आदी हैं। कोतवाली बीस पुलिस द्वारा पकड़े गये गैंग ने इस बात का खुलासा किया था।


ग्रेटर नोएडा के कॉलेज भी निशाने पर- ग्रेटर नोएडा में 50 से अधिक मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कालेज हैं। यहां पढ़ने वाले छात्र भी तस्करों के निशाने पर हैं। तस्कर कालेजों के बाहर छात्रों को मादक पदार्थ उपलब्ध करा रहे हैं। एक सप्ताह पहले आईईसी इंजीनियरिंग कॉलेज के रजिस्ट्रार एसडी सिंह ने एसएसपी से इस बात की लिखित शिकायत दर्ज करा चुके हैं।


कैसे लाया जाता है माल- नशीलों पदार्थो की तस्करी कई चरणों से होती है। मेन सप्लायर छोटे-छोटे एजेंटों के माध्यम से माल भेजा जाता है और संबंधित स्थानों पर डिलीवरी होने के बाद उसका कमीशन उसे तत्काल भुगतान कर दिया जाता है। एक बार में एजेंट को दो से पांच हजार रुपए तक कमीशन दिया जाता है। उड़ीसा और पूर्वाचल के जिले से लाया जाने वाले गांजा व चरस को सूटकेस और बक्शे में भरकर लाया जाता है। पदार्थ अंदर रखने के बाद परफ्यूम डाल दिया जाता है ताकि उसकी गंद बाहर न निकल सके। यही नहीं तस्कर फौजी जवानों द्वारा प्रयोग किये जाने वाले बक्शों का प्रयोग करते हैं ताकि पुलिस का आसानी से शक न हो सके। एजेंट कोट, पैंट व टाई लगाकर अप-टू-डेट बनकर चलते हैं।


नोएडा पुलिस समय-समय पर मुखबिरों की सूचना पर तस्करों के गैंग का खुलासा करती रहती है लेकिन यह खेल बड़े ही गोपनीय तरीके से चलाया जाता है। उनका कहना है कि पुलिस की लगातार पड़ती रेड के कारण यहां के बड़े सप्लायर सिकंदर, निकेश और तारा अब दिल्ली में बैठकर धंधा चला रहे हैं।
                                                                अशोक त्रिपाठी
                                                                 सिटी एसपी

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