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चायंती ग्राम में नहीं उगा विकास का सूरचा

मुख्यमंत्री को अपनी कविता सूरा की किरणें आती है.. नहीं सुना पायी जयंती ग्राम औड़ा की छात्रा निभा मुख्यमंत्री का मोबाइल नंबर ढूंढ रही है। नंबर की खोज जयंती ग्राम के कई अन्य महादलितों को भी है जिन्हें 11 फरवरी की सुबह का बेसब्री से इंतजार था। विकास यात्रा के क्रम में 10 फरवरी को खटहा आए सीएम मार्निग वॉक में इसी महादलित बस्ती की ओर आने वाले थे। स्वास्थ्य कारणों से टहलने न निकल पाये सीएम का इंतजार सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल औड़ा की छात्रा निभा को था। उसकी बेचैनी उदीयमान सूरा के ऊपर चढ़ने के साथ ही बढ़ती जा रही थी।ड्ढr ड्ढr सबको निराश कर सीएम साढ़े दस बजे सीधे जनता दरबार पहुंचे जिनके समीप न तो निभा पहुंच पायी, न ही खटहा गांव के पड़ोस स्थित औड़ा के महादलित। कई समस्याओं से जूझ रहे महादलितों की पीड़ा को सरकारी नुमाइंदे बढ़ा गये। जिसकी शिकायत मुनि टोला के लोग सीएम से करना चाहते थे। सीएम के आगमन को देखते हुए औड़ा के मुनि टोला में शौचालय बनाने हेतु प्रत्येक झोपड़ी के पास पांच-छह फीट के गड्ढे खोद दिये गये। सड़क के किनार दो-चार शौचालय बना दिये गए, लेकिन टोले के अंदरुनी भाग में खुदाई कर शौचालय बनाने के लिए इांीनियरों और ठेकेदारों ने एक सप्ताह की मोहलत ले ली।ड्ढr ड्ढr मुख्यमंत्री के दौर का एक महीने होने को है हरिान टोला के 12 शौचालय अधूरे हैं। नूरी सदा, गौरी सदा, प्यार सदा की शिकायत है कि उसके घर के सामने गड्ढा कर दिया गया जिससे दिन में भी घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बिलास तांती तो शौचालय के गड्ढे को भर देना चाहते हैं। वे कहते है कि मुख्यमंत्री के आने से घर के आगे गड्ढा खोद दिया जाता है तो अच्छा है मुख्यमंत्री गांव नहीं आएं।ड्ढr पूर्व मुखिया महेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि खटहा में सीएम के कहने पर सभी अधिकारियों ने अपने मोबाइल नंबर बता दिये, लेकिन सीएम साहब ने अपना नंबर तो बताया ही नहीं! यदि बताते तो शायद निभा उन्हें अपनी कविता सूरा की किरणें आती.. सभी अंधकार खो जाते है.. मोबाइल से ही सुना डालती और उन्हें अपने टोले में बुलाती जिससे गांव में छाया पिछड़ेपन अंधेरा दूर हो पाता। आग में जुड़वां मासूम झुलसेड्ढr छपरा (ए.सं.)। छपरा जंक्शन के रलवे कालोनी कैंपस में स्थित फूस की झोपड़ी में स्टोव से लगी आग में जुड़वां मासूम झुलस गए। तीन झोपड़ियां भी स्वाहा हो गयीं। सूचनानुसार, रिक्शाचालक तूफानी राम अपनी पत्नी तथा जुड़वां बच्चों सागर और शालिनी के साथ झोपड़ी बनाकर रहता था। रविवार को वह रिक्शा चलाने गया था। पत्नी सीमा देवी स्टोव पर खाना पकाने के दौरान बच्चों को घर पर छोड़कर नहाने चली गयी। तभी अचानक आग लग गयी। फूस की झोंपड़ी धू- धू कर जलने लगी। लोग बचाने आते तबतक सबकुछ स्वाहा हो चुका था। मासूम भी नहीं बचाए जा सके।ं

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  • Web Title: चायंती ग्राम में नहीं उगा विकास का सूरचा