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समवर्ती सूची वाले विधेयक को सरकार ने लिया वापस

समवर्ती सूची वाले विधेयक को सरकार ने लिया वापस

सरकार ने खेलों को संविधान की समवर्ती सूची में डालने के प्रावधान वाले विधेयक को आज यह कह कर राज्यसभा से वापस ले लिया कि अब इसकी कोई जरूरत नहीं है।
   

खेल मंत्री एमएस गिल ने संविधान (61वां संशोधन) विधेयक वापस लेने के सरकार के कदम का औचित्य बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार आज भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर होने वाली खेल स्पर्धाओं तथा अन्य मामलों में फैसले करती है। यह फैसले करने का अधिकार उसे संविधान में पहले से ही प्राप्त है।
   
उन्होंने कहा कि संविधान में खेलों को राज्यों की सूची में डाला गया है लेकिन खेल के मामले में केंद्र सरकार को भी पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं लिहाजा इस विधेयक की आवश्यकता नहीं है। गिल ने इसके बाद विधेयक को सदन की अनुमति से वापस ले लिया।

  इससे पूर्व सदन में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि दरअसल इस विधेयक को लाने की भी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि राज्य केवल अपनी सीमाओं के भीतर ही खेल स्पर्धाओं के बारे में निर्णय करते हैं। खेलों से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों में केंद्र ही फैसले करता है। इसलिए इसकी कोई जरूरत नहीं है।

जेटली ने कहा कि कुछ सरकारी अधिकारियों की गलत धारणा के कारण खेलों को समवर्ती सूची में डालने के लिए यह विधेयक लाया गया लेकिन उनकी यह धारणा बिल्कुल गलत है।

कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कहा कि इस बात का स्पष्ट हो जाना अच्छा है कि केंद्र सरकार खेलों के मामले में निर्णय कर सकती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेलों की राष्ट्रीय फेडरेशनें भी इस मामले में अस्पष्टता समाप्त होने से राहत महसूस करेंगी। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री पी शिवशंकर ने 17 नवंबर 1988 में राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया था।

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