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विकास का पश्चिमी माडल ही विनाश की जड़

विकास का पश्चिमी माडल ही विनाश की जड़

जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों को आड़े हाथ लेते हुए लोकसभा में सदस्यों ने कहा कि विकास का पश्चिमी माडल ही तबाही का असली कारण है और आज दुनिया को बर्बादी के कगार पर खड़ा कर ये देश अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की फिराक में हैं।

लोकसभा में नियम 193 के तहत जलवायु परिवर्तन पर बहस की शुरूआत करते हुए भाजपा के वरिष्ठ सदस्य डॉं मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव हैं जिनमें से दीर्घकालिक प्रभाव अधिक खतरनाक हैं जिनसे न केवल प्रजातियों, वनस्पति बल्कि खुद मानव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाएगा।

ग्लोबल वार्मिग के लिए विकसित देशों को दोषी ठहराते हुए जोशी ने कहा कि विकसित देश खुद के विकास और विकासशील देशों के विनाश की नीति पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास का पश्चिमी माडल का विकल्प अपनाए जाने तक इस समस्या का समाधान निकलना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि ध्रुवीय इलाकों में ग्लेशियरों के पिघलने से न केवल तटीय इलाके जलमग्न हो जाएंगे बल्कि उस क्षेत्र विशेष की प्रजातियां, वनस्पति और आगे चलकर खुद इंसान के अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था डूबी, उसी के कारण आज जलवायु पर संकट आ खड़ा हुआ है।

जोशी ने कहा कि कोपेनहेगन में भारत को मजबूती के साथ अपनी बात रखनी होगी, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

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