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जिसका कोई नहीं है सानी

जिसका कोई नहीं है सानी

कुदरत ने अपनी खूबसूरती के मोती समूचे उत्तराखंड में कुछ इस कदर बिखेर रखे हैं कि इस प्रदेश में जहां भी जाइए, प्राकृतिक छटाएं आपको अपने मोहपाश में बांध ही लेती हैं। अतुलनीय सौंदर्य से परिपूर्ण इस राज्य का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है कौसानी, जहां पहुंच कर वाकई यह महसूस होता है कि इस जगह का कोई सानी नहीं है।

दिल्ली से 410 कि.मी., नैनीताल से 120 और रानीखेत से 70 कि.मी. की दूरी पर स्थित इस छोटे से शांत पहाड़ी शहर की सबसे बड़ी खासियत है, यहां की आबोहवा और कुदरती छटाएं। समुद्र तल से करीब 1,890 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चीड़ के घने जंगल से घिरे कौसानी के एक ओर सोमेश्वर घाटी है और दूसरी ओर बैजनाथ कत्यूरी घाटी। अपनी इसी ऊंचाई के कारण यह जगह 350 किलोमीटर के दायरे में फैली विशाल हिमालय पर्वतमाला का अद्भुत दर्शन भी करवाती है। अगर मौसम साफ हो तो बर्फ से ढकी अनेक चोटियों के दिलकश नजारे यहां से देखे जा सकते हैं। असल में यहां आने वाले ज्यादातर पर्यटकों की मंशा भी यही होती है कि कुछ दिन यहां की शांति में हिमालय की चोटियों को देखते हुए गुजारे जाएं।

कौसानी का नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर यहां से करीब 180 कि.मी. दूर है। करीबी रेलवे स्टेशन काठगोदाम की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से यह जगह तमाम प्रमुख शहरों से जुड़ी हुई है और दिल्ली, चंडीगढ़, रानीखेत, लखनऊ , नैनीताल जैसे शहरों से यहां के लिए सीधी बसें मिल जाती हैं। ठहरने के लिए इस छोटे से शहर में होटल, गैस्ट हाउस, लॉज आदि की भरमार है। हर जेब के हिसाब से यहां रहने की सुविधा उपलब्ध है। यूं तो यहां साल के किसी भी मौसम में जाया जा सकता है, मगर मार्च से जून और फिर सितंबर से नवंबर ज्यादा बढ़िया समय है। यहां की बारिश और सर्दी का भी अपना अलग ही मजा है, पर यदि सर्दियों में जा रहे हैं तो थोड़ा अतिरिक्त इंतजाम जरूरी है। वैसे गर्म कपड़ों की जरूरत तो यहां साल भर पड़ती है।

यहां की देखने वाली जगहों में पहला आकर्षण अनासक्ति आश्रम है। दरअसल यह एक चायबागान के मालिक का अतिथि गृह था, जिसमें 1929 में महात्मा गांधी आकर ठहरे थे। यहीं रह कर उन्होंने ‘भगवद्गीता’ पर अपनी पुस्तक ‘अनासक्ति योग’ लिखी थी। यहां यात्रियों के ठहरने व भोजन आदि की पूरी व्यवस्था है। यहां ठहरने वालों के लिए आश्रम में सुबह-शाम होने वाली प्रार्थना-सभाओं में शामिल होना जरूरी है।  यहां गांधी जी से संबंधित संग्रहालय और एक बोर्ड पर गांधी जी की पूरी वंशावली भी लिखी है, जिसे पर्यटक चाव से पढ़ते हैं। यहां पास ही है पंत संग्रहालय। महाकवि सुमित्र नंदन पंत की जन्मस्थली रहे इस मकान में उनका बचपन बीता था। यहीं पर उन्होंने कई कविताएं भी रचीं। यहां से थोड़ी दूर स्थित है लक्ष्मी आश्रम, जहां गांधी जी की शिष्या सरला बेन (कैथरीन हैलेमन) ने सामाजिक कार्य करते हुए अपना जीवन गुजारा। यहां महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित की जाती हैं।

कौसानी से 5 किलोमीटर दूर पिन नाथ और बूढ़ा पिन नाथ आदि दर्शनीय स्थल हैं। गरुड़ बैजनाथ के प्राचीन मंदिरों का समूह 17 किलोमीटर दूर बागेश्वर के रास्ते पर है। साहसी पर्यटकों के लिए पिंडारी, काफनी और सुंदर ढुंगा ग्लेशियरों को जाने का रास्ता भी कौसानी से ही हो कर जाता है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यहां कई रमणीक ट्रैक भी हैं। कुमाऊंनी शालों की खरीदारी करके यहां की यादें घर तक ले जाई जा सकती हैं।

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