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राणा की जमानत पर सुनवाई 15 दिसंबर तक टली

राणा की जमानत पर सुनवाई 15 दिसंबर तक टली

आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में एफबीआई द्वारा अक्टूबर में गिरफ्तार किए गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध आतंकवादी तहव्वुर हुसैन राणा की जमानत याचिका पर सुनवाई एक संघीय अदालत ने 15 दिसंबर तक टाल दी है। उसने कहा है कि अदालत को सबूतों को परखने के लिये वक्त चाहिए।

अमेरिकी मजिस्ट्रेट नॉन नोलान ने जमानत याचिका पर राणा के वकील पैट्रिक ब्लेगन की दलील सुनने के बाद मामले की सुनवाई को 15 दिसंबर तक स्थगित कर दी।

ब्लेगन ने सबूत में तीन गवाहों को पेश किया, जिसमें राणा का एक संबंधी भी शामिल है। उन्होंने राणा को शांत, ईमानदार, विश्वासपात्र और अहिंसक व्यक्ति बताया और कहा कि वह हिंसा के बारे में बात तक नहीं कर सकता क्योंकि वह एक बहुत ही शांत प्रिय व्यक्ति है।


इस मामले की सुनवाई आगामी 15 दिसंबर तक स्थगित करते हुए जज नोलन ने कहा कि उन्हें इस बयान को ठीक से पढ़ने के लिये एक हफ्ते का समय चाहिए। इसमें अक्टूबर में गिरफ्तारी के बाद राणा द्वारा एफबीआई को दिये गए बयान का पांच घंटे की अवधि वाला वीडियो भी शामिल है।

उन्होंने कहा मैं इस मामले पर अच्छी तरह काम करना चाहती हूं, क्योंकि राणा के मामले की मैं एकमात्र जज हूं। नारंगी कपड़े पहने राणा सुनवाई के दौरान खामोश रहा। उस दौरान उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।

सुनवाई के दौरान मामले में गवाह और स्थानीय नेत्र चिकित्सक मोहम्मद अरशद मिर्जा ने कहा कि वह राणा को तब से जानते हैं जब से वह इकबाल सोसाइटी का सदस्य बना। यह सोसाइटी मुसलमानों के शिक्षण तथा अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए उनके लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कार्य करती है।

मिर्जा ने कहा कि डेनमार्क के अखबार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कथित कार्टून पर एक बार चर्चा हुई और हमने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन कोई क्या कर सकता है।

दूसरे गवाह रजा मुहम्मद याकूब ने कहा कि राणा के परिजनों सहित करीब 20 लोगों ने पिछले रविवार को राणा के मामले को समझने के लिए मुलाकात की और चर्चा की कि कैसे उसे मदद की जाए।  हर किसी का मानना था कि राणा भरोसेमंद, ईमानदार और अच्छा इंसान है।

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