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उड़ीसा नहीं बनेगा बिहार : नीतीश

किशनगंज और मधुबनी सीट को लेकर जदयू और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा इन सीटों को किसी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है तो जदयू इन्हें हर हाल में भाजपा से छीनने की तैयारी में है। उड़ीसा की घटना के बाद भाजपा अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में उड़ीसा जसी स्थिति नहीं है। यहां जदयू-भाजपा मिलकर ही लड़ेंगे। उधर दिल्ली में भाजपा कोर कमेटी की बैठक में बिहार के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में भाजपा द्वारा जदयू की सीटों पर किए गए दावे के साथ जदयू की मांग पर भी पार्टी नेताओं ने विमर्श किया। खासकर किशनगंज और मधुबनी सीट को लेकर जदयू की जिद पर पार्टी के कई नेताओं ने नाराजगी प्रगट की।ड्ढr ड्ढr खबर है कि जदयू व भाजपा ने अपने शीर्ष नेताओं को अपनी इच्छा से अवगत करा दिया है। भाजपा की प्रदेश इकाई को जदयू की मांग पर घोर आपत्ति है। भाजपा का प्रदेश नेतृत्व हर हाल में इन दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी बरकरार रखना चाहता हैं। कुछ बड़े नेता इसी मुहिम में दिल्ली में कैम्प किए हुए हैं। पिछले दिनों दिल्ली में हुई पार्टी के बड़े नेताओं की बैठक के बाद भाजपा ने अपने निर्णय से जदयू को भी अवगत करा दिया है। दूसरी ओर जदयू पीछे हटने को कतई तैयार नहीं है। जदयू का कहना है कि भाजपा 40 सीटों पर लड़कर जितनी सीट जीत सकती है उससे अधिक अगर 14 या 15 सीट पर लड़कर जीते तो कौन बेहतर होगा? जदयू और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अभी ‘वेट एंड वाच’ के मूड में हैं। दोनों के थिंक टैंक रणनीति बनाने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार जदयू किशनगंज सीट को लेकर अधिक आक्रामक है।

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