class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

देशरत्न

देश की धरती के नीचे अनेक रत्न पाए जाते हैं। बिहार की धरती भी सोना (फसल) और खनिज पदार्थ देती रही है। इसी भूमि पर रत्नगर्भा माँ की कोख से जन्में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की विलक्षणता देश भक्ति, सरलता और उनके देसीपन को देखकर लोगों ने उन्हें देशरत्न की उपाधि से नवाजा था। बाद में 13 मई 1962 को उन्हें ‘भारत रत्न’ से भी अलंकृत किया गया।

बिहार के जीरादेई गांव में जन्मे राजेंद्र प्रसाद ने पूरे देश के साथ ही महात्मा गांधी तक को काफी प्रभावित किया था। गांधी ने उनके लिए कहा भी था, ‘राजेंद्र बाबू ने प्रेम से मुझे ऐसे अपंग बना दिया था कि मैं उनके बिना एक कदम आगे नहीं रख सकता था। मेरे साथ काम करने वालों में राजेंद्र बाबू सबसे अच्छों में एक हैं’। ‘राजेंद्र बाबू का त्याग हमारे लिए गौरव की वस्तु है। नेतृत्व के लिए इन्हीं के समान आचरण चाहिए’।

उनके सादा जीवन उच्च विचार से देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी प्रभावित थे। उन्हीं के शब्दों में - ‘उनके राष्ट्रपति पद पर रहते हुए बारह साल में हमने जो कुछ किया उनकी देख-रेख में शान से किया। हम यदि गलती भी करते थे तो वे हमें संभाल लेते थे।’

भारत के धन से ही अंग्रेजों के शान-शाकत, जीवन-यापन का अभ्यासी राष्ट्रपति भवन, बिहार के गांव के उस सपूत के आने पर लिट्टी-चोखा, सत्तू के सुगंध से महकने लगा। टूटी पनहिया और फटी धोती में गांवों से आए उन किसानों का भी राष्ट्रपति भवन में वैसा ही स्वागत होता था, जैसा बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्षों का। साहित्य, इतिहास और विधि का गहनतम अध्ययन करने वाले राजेंद्र बाबू गांधी दर्शन से अत्यंत प्रभावित थे।

उनका कहना था - ‘गांधी ने हमें सिखाया कि व्यक्तिगत, सामाजिक तथा राष्ट्रीय जीवन में कोई अंतर नहीं है। इसलिए जो कुछ व्यक्ति जीवन के लिए हानिकारक है, वह राष्ट्रजीवन के लिए भी होगा।’ काश! हम उनके आदर्शों पर चले होते।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:देशरत्न