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टिकैत को सरकारी शह पर रालोद खफा

गन्ना मूल्य को लेकर तेज हो रहे शह-मात के खेल में बुधवार को नया समीकरण उभरा। किसान नेता चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने मंगलवार को लखनऊ में धरना दिया था तो राज्य सरकार ने उन्हें भरपूर तवज्जो दी थी। श्री टिकैत से वार्ता कर किसानों के हक में भरपूर कोशिश करने की बात कही गई थी। सरकार की पहल को राष्ट्रीय लोकदल की ओर से किसानों को संगठित करने की कोशिश की हवा निकालने की कार्रवाई के तौर पर देखा गया था। टिकैत के प्रति सरकार की इस उदारता तिलमिलाए रालोद ने बुधवार को घोषणा की है कि वह अपना आंदोलन और तेज करेगी।

 पार्टी ने ऐलान किया है कि किसानों को उत्तराखंड और हरियाणा के बराबर मूल्य दिलाया जाएगा। जो मूल्य नहीं देगा उसके खिलाफ किसान पंचायत का आयोजन किया जाएगा। बुधवार को यहाँ यह घोषणा करते हुए रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामआसरे वर्मा और महासचिव व प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि अब मुद्दा सिर्फ गन्ने का ही नहीं बल्कि सरकारी हीलाहवाली से गेंहू की बुवाई में हो रही देरी का भी है। राज्य सरकार गन्ना किसानों को राहत देने के बजाए सिर्फ राजनीति पर उतर आई है। इस मसले पर किसानों को बाँटने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने कहा किर राष्ट्रीय लोकदल अब नई रणनीति के हिसाब से काम करेगा। रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि रालोद अध्यक्ष चौ.अजित सिंह ने इसके लिए नई नीति तैयार की है। अब उत्तराखंड और हरियाणा की तर्ज पर गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किसान पंचायत लगाकर आंदोलन होगा। यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक सम्बंधित मिल सही दाम देने की घोषणा नहीं कर देती। राष्ट्रीय लोकदल ने राज्य सरकार से माँग की है कि वह गन्ने के मसले पर सियासत बंद करे।

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