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आयोगों के गठन का कोई औचित्य नहीं

इस देश में जब भी कोई हादसा होता है, जांच आयोग बिठा दिया जाता है। जांच आयोग के निहितार्थ यही हैं, एक सरकारी संस्था जो शक्ति-अधिकार विहीन है, यह किसी अपराधी को पेशी के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इसकी रिपोर्ट और इसके समक्ष दिए बयानों का कोई महत्व नहीं होता। यह आयोग सजा नहीं दे सकता। तब खुद ही निर्णय करें इसका औचित्य क्या है? इसकी प्रभावहीनता पर प्रश्नचिह्न् लगे हैं।
शशिप्रभा शर्मा, हापुड़, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

यह कैसा आयोग?
जिस लिब्रहान आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी को सुनवाई के दौरान एक बार भी नहीं बुलाया हो उन्हें वह आयोग कैसे दोषी करार दे सकते हैं। यह कैसा आयोग है, जो मुजरिम को अपनी सफाई तक भी देने का अवसर नहीं देता।
सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

आखिर कब तक
उन्नीकृष्णन के पिता का आक्रोश करना उचित है। क्योंकि यह आक्रोश चरमराई व्यवस्था की ओर था। क्योंकि हर कोई सोचता है कि हमारे शहीद बेटे ने तो देश के लिए लड़ाई लड़ी। अब उसके जाने के बाद अब उनको लड़ाई लड़नी पड़ रही है वो भी व्यवस्था के प्रति। आखिर कब तक हमको इस तरह की व्यवस्थाओं से जूझना पड़ेगा। कब इस देश के लिए कुर्बानी देने वाले के माता-पिता गर्व करना महसूस करेंगे।
निहाल सिंह, मंडावली, दिल्ली

कौआ चला हंस की चाल
कौआ चला हंस की चाल वाली कहावत पर अब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) चल पड़ी है, क्योंकि पीली बसों को दोबारा लो फ्लोर की तर्ज पर हरा रंगा जा रहा है। इस कारण पीली बसों का रंग न तो पीला ही रह जाता है और न ही हरा हो पाता है, क्योंकि हरा रंग गुणवत्ता में एकदम घटिया चमक रहित है।
डेनीयल, दिल्ली

सराहनीय कार्य
‘महामहिम ने परखी सुखोई की रफ्तार’ मुझे बहुत अच्छा लगा। इससे महिला जगत में निडर प्रकृति, बहादुरी, गंभीरता, वीरता व देश को एक उन्नतशील दिखाने की मिसाल कायम की है। जिस देश की राष्ट्रपति बहादुर व निडर होगी उस देश पर राष्ट्रपति जी की बहादुरी का असर भी जरूर पड़ेगा।
श्याम सुन्दर, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

महंगाई की मार
आज आम क्या खास व्यक्ति भी महंगाई से परेशान है। जनता को महंगाई ने बुरी तरह जकड़ रखा है और बेचारी छटपटा रही है। अब तो यह बात भी चुभने लगी है कि ‘दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ’ क्योंकि आज दाल का मूल्य भी गरीब जनता के हाथों से निकलता जा रहा है।
गौरव कलशानियां, जामिया मिलिया, नई दिल्ला

स्वतंत्र निर्णय लेने में अक्षम
जब भाजपा जैसा राष्ट्रीय राजनीतिक दल अपने आंतरिक मामलों में भी स्वयं स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, तब वह राष्ट्र और नागरिकों के लिए कितना कल्याणकारी होगा..?
विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़

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पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
इंग्लैंड284/8(50.0)
vs
न्यूजीलैंड287/7(49.2)
न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 3 विकटों से हराया
Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
इंग्लैंड284/8(50.0)
vs
न्यूजीलैंड287/7(49.2)
न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 3 विकटों से हराया
Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
दूसरा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
न्यूजीलैंड
vs
इंग्लैंड
बे ओवल, माउंट मैंगनुई
Wed, 28 Feb 2018 06:30 AM IST