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24 साल बाद मिला मिश्रीलाल को इन्साफ

तमंचा रखने के मामले में चल रहे एक मुकदमे में पुलिस की फर्जी गिरफ्तारियों की पोल खुल गई। बेगुनाहों को सीखचों के पीछे भेजने वाली पुलिस ने अपनी कारगुजारी से एक बदनसीब को 24 साल तक दर्द दिया। तमंचा रखने के आरोप में गिरफ्तार मिश्रीलाल 24 साल तक कचहरी में दौड़ लगाकर अपनी बेगुनाही की फरियाद करता रहा। ढीठ पुलिस हर हाल में उसे फँसाने में तुली रही। आखिरकार मिश्रीलाल को जवानी से बूढ़ा हो जाने पर इंसाफ मिला और अदालत ने उसे सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

इंसाफ के लिए 24 साल तक पुलिस से लड़ाई लड़ने वाला मिश्रीलाल फूलपुर कस्बे का रहने वाला है। 23 अप्रैल 1985 को फूलपुर पुलिस ने मिश्रीलाल को अवैध रूप से तमंचा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कुछ दिन जेल में रहने के बाद उसे जमानत तो मिल गई लेकिन मुकदमा चलता रहा। मिश्रीलाल ने भी हार नहीं मानी।

इस मामले में बुधवार को स्पेशल सीजेएम अब्दुल जमील ने कहा कि पत्रवली पर साक्ष्य से आरोपित के खिलाफ आयुध अधिनियम का आरोप साबित नहीं होता है। इसलिए दोषमुक्त होने योग्य है। अदालत ने पुलिस के संबंध में कहा कि सभी साक्षी पुलिस वाले हैं जिनमें से अभियोजन पक्ष ने किसी को भी बतौर गवाह पेश नहीं किया है।

अदालत ने कहा कि पुलिस के अनुसार जिस स्वतंत्र साक्षी मो. शमीम के सामने बरामदगी हुई थी। उसने अदालत में कहा है कि दरोगा ने सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिया था। उसने बयान दर्ज होने से इनकार कर दिया है। बरामदगी उसके सामने होने से भी साक्षी ने इनकार कर दिया। फूलपुर कस्बे का यह मामला बुधवार को कचहरी में सबसे अधिक चर्चा में रहा।

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  • Web Title:24 साल बाद मिला मिश्रीलाल को इन्साफ
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