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बॉस न.1

हम सभी को बचपन से सिखाया जाता है कि ईर्ष्या, लालच, गुस्सा, पेटूपन और काहिलपन जैसी बुराइयों से दूर रहना चाहिए। बतौर लीडर हम लगातार नए सिद्धांत और तकनीक बनाते हैं। जिंदगी में लीडर के सामने परिस्थितियां एक समान नहीं रहती। सफलता हासिल कर लेने पर एक लीडर बेहद खुशी का अनुभव करता है तो वहीं कई बार घोर निराशा अवसाद में ले जाती है।

बड़ी बात ये है कि लीडर के तौर पर आपको इन दोनों का आनंद उठाना चाहिए और दोनों ही परिस्थितियों में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देना चाहिए। आज हम ऐसी ही कुछ बातों की चर्चा करेंगे जिनको अपनाकर आप एक प्रभावशाली नेता बन सकते हैं।

अहंकार : अकसर मैनेजर ऐसा स्वभाव दर्शाते हैं कि वह बहुत कुछ जानते हैं और उनकी तुलना में उनकी टीम कम है। किसी भी मैनेजर के स्वभाव में विश्वास होना जरूरी है, लेकिन जब ये विश्वास अहंकार में तब्दील हो जाए तो तमाम तरह की मुश्किलें खड़ी कर देता है। अपनी टीम पर पूरा भरोसा करें और अपने सहयोगियों को पूरा सम्मान दें।

जिद्दी : कई बार बतौर लीडर अपनी बात मनवाने के लिए हठी हो जाते हैं और अपनी टीम की सलाह को अनसुना कर देते हैं या उनकी नसीहत को तवज्जो नहीं देते। जिसकी वजह से लोग बड़े नुकसान उठा बैठते हैं। किसी मैनेजर के लिए यह जरूरी है कि अपने विचारों को टीम पर न थोपें और टीम के अन्य सदस्यों की बात को गंभीरता से सुने।

डरपोक : लीडर के रूप में अगर बेहतर कार्यो का सेहरा आपके सिर बांधा जाता है तो खराब हुए कार्यो की जिम्मेदारी भी आपको लेनी चाहिए। इसके लिए टीम के अन्य सदस्यों पर आरोप मढ़ना सही नहीं है।

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