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नदी के रास्ते अपराध करने वालों की कसेगी नकेल

बिहार में रिवर पुलिसिंग नया कांसेप्ट है। दियारा की सोना उगलने वाली इंच-इंच जमीन को लेकर होने वाली हिंसा और नदी के रास्ते अपराध करने वाले जल दस्युओं पर नकेल कसने के लिए ही पुलिस ने यह पहल की है। सूबे के दियारा क्षेत्रों में पांच रिवर पुलिस स्टेशन को सरकार ने हरी झंडी दी है। रिवर पुलिस स्टेशन के जवानों को अत्याधुनिक हथियारों और संचार साधनों से लैस किया जाएगा। नदी के रास्ते कई तरह के अपराध होते है। अपहर्ता गिरोहों के लिए भी दियारा क्षेत्र महफूज ठिकाना रहा है। अपहृतों को दियारा क्षेत्र में नावों में छिपाने की घटना कई बार सामने आयी है। इसके अलावा तस्करी के लिए भी नदी का इस्तेमाल होता रहा है। अधिकारियों का मानना है कि रिवर पुलिसिंग से ऐसे अपराधों पर भी अंकुश लगेगा। इधर डीजीपी आनंद शंकर ने कहा कि रिवर पुलिस स्टेशन में तैनात होने वाले जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। पुलिस स्टेशन का निर्माण नदी के किनारे होगा और वहां स्टॉफ क्वार्टर की भी सुविधा दी जाएगी।


खगड़िया नरसंहार के बाद से ही बक्सर से लेकर कटिहार तक फैले दियारा की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद और बर्चस्व की लड़ाई से राज्य सरकार के कान खड़े हो गए थे। दियारा क्षेत्र की बेहद ऊपजाऊ जमीन को लेकर बर्चस्व की लड़ाई नयी नहीं है। इस विवाद का दायरा भी व्यापक है। कुल मिलाकर मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा है और सरकार मानती है कि अपराध को रोकना पुलिस का प्रमुख कर्तव्य है। लिहाजा भूमि विवाद के मसलों को निपटाने के लिए राज्य सरकार पुलिस को अधिक सक्रिय बनाने में जुटी है और रिवर पुलिसिंग उसका एक हिस्सा है।  विवाद और फौजदारी की नौबत आए इसके पहले ही मामले सलटा देने की जिम्मेवारी पुलिसकर्मियों पर होगी। इसके तहत पुलिसकर्मी भूमि विवाद से जुड़ी जानकारी इकठ्ठा करेंगे। जमीन पर दावेदारी पेश करने वाले दोनों पक्षों को बुलाकर उनसे बातचीत की जाएगी। यहां तक की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस देखेगी। इसी सिलसिले में पुलिस मुख्याय ने आरक्षी अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे दियारा की जमीन के विवाद पर निगाह रखें और सुलझाएं।

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