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पौधशाला से कन्नी काट रहे वनकर्मी

टिहरी बांध की ङील के ऊपर के क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए 40 लाख की लागत से बनाई गयी हाईटेक पौधशाला से वन कर्मी पिण्ड छुड़ाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। उन्होंने डीएफओ को पत्र लिख कर स्पष्ट किया है कि नर्सरी में पौध उगाना संभव नहीं है।

घनसाली तहसील क्षेत्र में टिहरी डैम वन प्रभाग प्रथम के बालगंगा डैम रेंज द्वारा पिलवा नामक स्थान पर दो हेक्टेयर भूमि में वर्ष 2007 में बनाई गई इस हाईटेक पौधशाला से हर वर्ष दो लाख पौधे तैयार करके भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में रोपे जाने थे, लेकिन यह आंकड़ा 80 हजार तक भी नहीं पहुंच पाया है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार नर्सरी में इस वर्ष तैयार 78 हजार पौध भी उत्तम क्वालटी की नही थी। सड़क से दूर होने के कारण यह पौधशाला आम लोगों की नजरों से भी ओझल है। जबकि इसमें पोली हाउस, मिस्ट चेम्बर, ग्रीन नेट हाउस, बर्मी कम्पोस्ट हाउस बने हैं पर कर्मियों की अरुचि के चलते इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

यहां के रेंज अधिकारी गंगा प्रसाद कोठारी का तर्क है कि जिस स्थान पर हाईटेक पौधशाला बनी, वहां की मिट्टी उपजाऊ नहीं है। उन्होंने बताया कि नर्सरी की मिट्टी का परीक्षण कराया गया तो मिट्टी की गुणवत्ता खराब निकली। अतिरिक्त मिट्टी भरकर ही वहां लक्ष्य के मुताबिक पौध तैयार की जा सकती है।

वहां वर्ष 1983 से पौध उगाई जा रही है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो गई। प्रभागीय वनाधिकारी को हाईटेक पौधशाला में पौध तैयार न करने का सुझाव दिया गया है। उधर प्रभागीय वनाधिकारी बालेश्वर का कहना है कि उन्होंने राजि अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

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