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16 करोड़ का नहीं हुआ इस्तेमाल

प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिला प्लान में रखे गये सामुदायिक विकास योजना के लगभग 16 करोड़ की धनराशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे नाराज सरकार के ग्राम्य विकास विभाग ने जिलों को चेताया है कि अवशेष धनराशि का उपयोग दिसम्बर माह तक अवश्य कर लिया जाय अन्यथा अगली किस्त देने पर रोक लगा दी जायेगी।

प्रत्येक जिले की जिला योजना में सामुदायिक विकास योजना के अंतर्गत लाखों रुपये की धनराशि का प्राविधान रखा गया था। इस सामुदायिक विकास योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के विकास खंडों में आवासीय/ अनावासीय भवनों के निर्माण के साथ विकास भवनों का निर्माण किया जाना था।

प्रदेश के 13 जिलों में विकास खंड़ों में बनने वाले भवनों के लिये वित्तीय वर्ष 2008-09 में भी पूरी धन राशि व्यय नहीं हो पायी थी। इस बीते वित्तीय वर्ष में 1011.86 की धनराशि बिना उपयोग के जिलों में पड़ी हुयी थी। इसके बाद जिलों ने इसी मद में एक करोड़ की धनराशि और स्वीकृत करवा ली। इसके अलावा जिले के विकास भवनों के निर्माण में भी एक करोड़ रूपये और मंजूर करवा लिये गये जबकि इस निर्माण के लिये जिलों के पास पहले से ही 359.94 लाख की धनराशि पहले से पड़ी थी।

राज्य स्तर पर हुयी समीक्षा में सरकार के सामने यह मामला खुला कि जिलों ने 1571.80 लाख की धनराशि का उपयोग अभी तक नहीं किया है। इस कुल धनराशि में से मात्र 419.80 लाख का ही उपयोग हो पाया है। प्रदेश का रुद्रप्रयाग जनपद ऐसा है जिसने 321.51 लाख की धनराशि होते हुये भी मात्र 50 हजार रूपये ही खर्च किये, चंपावत जिले की स्थिति भी कमोवेश ऐसी ही है इस जिले ने भी इस मद में मात्र साढ़े नौ लाख ही व्यय किये हैं।

आयुक्त ग्राम्य विकास नृप सिंह नपलच्याल ने इस पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुये जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि तमाम निर्देशों के बाद भी विकास अधिकारी निमार्ण कार्यों की गुणवत्ता व समयवद्धता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पत्र में यह भी चेताया गया है कि अवशेष पड़ी धन राशि का उपयोग यदि दिसम्बर माह तक नहीं किया गया तो अगली किस्त नही दी जायेगी।

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