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ये विश्वविद्यालय कैसे करेंगे काम

प्रदेश के सबसे बड़े और अकेले केंद्रीय विश्वविद्यालय एचएनबी गढ़वाल विवि की पुरानी वेबसाइट काम नहीं कर रही है और नई अभी बन नहीं पाई। यही स्थिति संस्कृत विवि की है। दूसरे सरकारी विश्वविद्यालयों ने वेबसाइट तो बनवा ली है लेकिन वे महीनों से अपडेट नहीं हुई। यह हाल तब है जब यूजीसी सारी चट्ठी-पत्री ऑनलाइन भेज रही है।

पिछले महीने यूजीसी ने वेबसाइट के बारे में विश्वविद्यालयों को व्यापक निर्देश भेजे हैं। भविष्य में यूजीसी का सभी पत्रचार ऑनलाइन ही होगा। लेकिन, प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्थिति वैसी खुशगवार नहीं जैसी कि होनी चाहिए। एचएनबी गढ़वाल विवि की पुरानी वेबसाइट में अब विश्वविद्यालय की बजाय किसी बैंकर संस्था का ब्योरा मिल रहा है।

‘उत्तराडॉटइन’ पर गढ़वाल विवि का लिंक था लेकिन अब ‘उत्तरा’ ने काम बंद कर दिया है। इसलिए इंटरनेट पर विवि का होम-पेज तलाश करना असंभव काम है। कुलपति प्रो. एसके सिंह का कहना है कि नई वेबसाइट के निर्माण का काम चल रहा है। नए विश्वविद्यालयों में संस्कृत विवि की भी ऐसी ही स्थिति है। विवि ने वेबसाइट तो बनवा ली है लेकिन यह काम नहीं कर रहा है।

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