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अब महादलितों की बस्तियां होगी जगमग

 महादलितों की बस्तियां अब सौर ऊर्जा से जगमग होंगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में कार्ययोजना तैयार की है और अब उसपर अमल शुरू हो गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू होगी। हालांकि इसमें वैसे टोले-मुहल्लों को शामिल किया जाएगा। जहां फिलहाल बिजली के खंभे और तार पहुंचाना संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे स्थानों को प्रारंभिक रूप से बिजली की सुविधा सौर ऊर्जा के माध्यम से दी जाएगी। हालांकि पिछले दिनों राज्य सरकार ने थारू जनजाति की बस्तियों के लिए ऐसी ही योजना स्वीकृत की है। अब इस योजना का विस्तार कर सभी महादलितों को इसमें शामिल किया जाएगा।

    बिहार रिन्यूबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) के तत्वावधान में राज्य सरकार ने इस योजना की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत जिलास्तर पर ऐसे टोलों और गांवों की सूची तैयार की जा रही है जहां फिलहाल बिजली की पहुंच नहीं है या फिर जहां बिजली की जरूरत है और सोलर स्ट्रीट लाइट की संभावना है। इस समय सूबे में ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना चल रही है लेकिन उसकी गति काफी धीमी है। पावरग्रिड कारपोरेशन द्वारा 24 जिलों में जबकि एनएचपीसी द्वारा 6 जिलों में ग्रामीण विद्युतीकरण किया जा रहा है। शेष 8 जिलों में बिहार बिजली बोर्ड अपने बूते बिजली पहुंचाने में जुटा है। बोर्ड द्वारा हाल में ही यह योजना शुरू की गई है। कुटीर ज्योति योजना के तहत गरीबों को मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है। कई तकनीकी समस्याओं के कारण यह योजना सरजमीन पर ढंग से उतर नहीं पा रही। इस समय सूबे में 44 लाख महादलित हैं जबकि रविदास को शामिल करने के बाद यह संख्या 80-85 लाख तक पहुंच गई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी बस्ती है जहां बिजली नहीं पहुंच पाई है।

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