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अब कुष्ठ रोगियों की बेटियों के सपनों को लगेंगे पंख

कुष्ठ रोगियों की बेटियों को बेहतर शिक्षा व पुनर्वास की ठोस पहल उत्तराखंड से होगी। उनके जीवनसाथी चुनने का सपना भी सच होगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने देश में अपनी तरह के पहले  और अनूठे प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया है।

रुद्रपुर में 125 वर्ष पुराने दूधिया बाबा संन्यास आश्रम में कुष्ठ रोगियों की पांच सौ बालिकाओं को 12 वीं तक निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस बोर्डिग स्कूल में देश भर के कुष्ठ रोगियों की लड़कियों को कम्प्यूटर, कढ़ाई-बुनाई व सिलाई का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 12वीं के बाद इन लड़कियों को नर्सिग का प्रशिक्षण देने की भी योजना है।

कुष्ठ रोगियों की लड़कियों के स्वावलंबी बनाने के बाद उन्हें विवाह के पवित्र बंधन में भी बांधने की भी योजना है। हरिद्वार के दिव्य प्रेम आश्रम में कुष्ठ रोगियों के 250 लड़के शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहले बैच के छात्र आठवीं कक्षा में है। कुष्ठ रोगियों के लड़के और लड़कियों के विवाह में आने वाली कठिनाइयां किसी से छुपी नहीं है।

संघ के सूत्रों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षा ग्रहण करने के बाद कुष्ठ परिवार के यह बच्चों अपनी पसंद का जीवन साथी भी चुन सकेंगे। अभी तक कुछ मिशनरियां कुष्ठ रोगियों के बच्चों को बचपन में ही अंगीकार कर योजनाबद्ध तरीके से अपने प्रचार अभियान में झोंक देती है।

इस मिशन के जरिए संघ मिशनरियों की धर्म परिवर्तन की योजना को भी झटका देने के मूड में है। हाल ही में मुख्यमंत्री डा. निशंक ने संघ के इस मह्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए रुद्रपुर में दूधिया बाबा संन्यास आश्रम की 8.6 एकड़ भूमि की 90 वर्षों की लीज स्वीकृत की है।

जनवरी माह में रुद्रपुर में भूमि पूजन किया जाएगा। इस मौके पर संघ के केन्द्रीय नेता व मुख्यमंत्री डा. निशंक मौजूद रहेंगे। स्कूल के निर्माण के लिए विभिन्न संगठनों के माध्यम से धन एकत्र किया जा रहा है। हाल ही में आगरा में अतुल कौशल जी महाराज के कथा आयोजन में एकत्रित धनराशि स्कूल के निर्माण में खर्च की जाएगी।

संघ के अनुषांगिक संगठन वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा प्रकल्प संस्थान समेत कई अन्य संगठन दूधिया बाबा के नाम से निर्मित होने वाले इस स्कूल के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।

सेवा प्रकल्प संस्थान के संगठन मंत्री डालचंद का कहना है कि इस अनूठे स्कूल में कुष्ठ रोगियों के बच्चों अपने पैरों पर खड़ा होने के बाद सामान्य नागरिक की तरह जीवन यापन कर सकेंगे।

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