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बीएसएनएल ने जईन के अधिग्रहण का मामला फिलहाल रोका

बीएसएनएल ने जईन के अधिग्रहण का मामला फिलहाल रोका

सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने बुधवार को कहा कि उसने कुवैत की जईन टेलीकाम के प्रस्ताव अधिग्रहण का मामला फिलहाल रोक (होल्ड) रखा है अभी उसे इस मामले में उसके साथ भागीदारी की इच्छा जता रही घरेलू कंपनी ववासी से आवश्यक जानकारी नहीं मिली है। उल्लेखनीय है कि ववासी ने जईन के अधिग्रहण के लिए कंपनियों का समूह बनाने का और उसमें बीएसएनएल को भी जोड़ने का प्रस्ताव किया है।

 

      बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कुलदीप गोयल ने आज कहा, हमने ववासी से उसी के बारे में कुछ जानकारियां मांगी थीं, लेकिन अभी तक हमें ये जानकारियां नहीं मिल पाई हैं। इसके मददेनजर हम कह सकते हैं कि जईन टेलीकाम के अधिग्रहण का मामला अभी एका हुआ है। ववासी दिल्ली की कंपनी है जो दूरसंचार से लेकर अक्षय उर्जा जैसे क्षेत्रों में परिचालन करती है। यह पूछे जाने पर कि क्या बीएसएनएल जईन टेलीकाम से सीधे संपर्क करने पर विचार कर रही है, गोयल ने कहा, फिलहाल इस तरह की कोई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में निवेश के लिए 14,000 करोड़ एपये की राशि रखी है। इन राशि में काफी का मोबाइल लाइनों तथा नेटवर्क के विस्तार पर निवेश किया भी जा चुका है।


गोयल ने कहा कि देश में दूरसंचार कंपनियों के बीच काल दरें घटाने की होड़ के कारण निश्चित रूप से बीएसएनएल की आय पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि ग्राहकों की संख्या में बढ़ोत्‍तरी से इसकी भरपाई कर ली जाएगी। बीएसएनएल-स्वान टेलीकाम सौदे की सीबीआई जांच होने संबंधी खबरों के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी जांच की जानकारी नहीं है।
    
बीएसएनएल के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) के लिए कंपनी द्वारा नेटवर्क का एक बार परीक्षण किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसका अंतिम परीक्षण अभी होना बाकी है।
    
अधिकारी ने कहा कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी एक व्यापक सेवा है और इसके लिए अभी सभी आपरेटर पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सरकार ने दूरसंचार कंपनियों से 31 दिसंबर, 2009 तक एमएनपी के लिए अपना नेटवर्क तैयार करने को कहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल ने कल 31 दिसंबर तक एमएनपी को लागू करने में अपनी असमर्थता जताई थी।
    
इस बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि 31 दिसंबर तक इस सेवा को लागू करना आसान नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह एक कंपनी का मामला नहीं है। इसके लिए पूरे दूरसंचार क्षेत्र को अपने नेटवर्क को तैयार करना होगा।

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