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4 जून, 2020|1:20|IST

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दो टूक (02 दिसंबर, 2009)

विदेशी सैलानियों के स्वागत को सजती और अंतरराष्ट्रीय शहरों से होड़ को मचलती दिल्ली की एक शक्ल यह भी है जहां गड्ढे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं। क्या बुजुर्ग क्या बच्चे, राजधानी में जगह-जगह खुले-अधखुले मैनहोल और गड्ढों ने कई लोगों की जानें ली हैं।

शकूरपुर में एमसीडी के एक पार्क में गड्ढे से दो बच्चों के शव मिलने के बाद निगमायुक्त ने मामले पर जांच बैठाई है। लेकिन इससे क्या होता है? क्या यह इस तरह का पहला मामला है? पूर्व के हादसों से प्रशासन ने क्या कोई सबक सीखा? अफसरों की मुंदी हुई आंखों और खुले गड्ढों के इस शहर में क्या पूरी व्यवस्था ही किसी गड्ढे में जा पड़ी है?

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  • Web Title:दो टूक (02 दिसंबर, 2009)