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जेल के विद्यालय में बंदियों को पढ़ाने का भी करते हैं कार्य

‘अन्याय और अत्याचार आचरण से मनुष्य का हृदय कमजोर और निर्बल हो जाता है। भय पैदा हो जाता है। ’
गीता के एक श्लोक का ये भावार्थ अपनी लेखनी के माध्यम से प्रस्तुत किया है एटा के जिला जेल में साढ़े तीन साल से कैद एक बंदी ने।

शुरू से ही धार्मिक विचारों वाले इस कैदी ने जब जीवन से अपनी सारी आशाएं छोड़ दीं तो पकड़ ली भक्ति और जुनून की राह। जेल में ही उन्होंने वर्तमान परिवेश में गीता के भावार्थ पर करीब पाँच सौ पेज की रचना लिख डाली। जेल अधीक्षक का भी सहयोग मिला और अब एक स्वयंसेवी संस्था ने उनकी रचना को प्रकाशित करने का निर्णय लिया है।

कांशीराम नगर जनपद के थाना सिकंदरपुर के गांव नरहैटी के निवासी 66 वर्षीय ओमवीर सिंह पुत्र नवल सिंह 20 अप्रैल 2006 से हत्या के आरोप में जिला जेल में बंद हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। बीडीआरएस इंटर कालेज, राजा के रामपुर में शिक्षक रहे ओमवीर सिंह जब जेल में बंद हुए तो उनको समाज और अपने आप से नफरत होने लगी थी। वे सोचते थे कि उम्र के इस पड़ाव में यह क्या झंझट लग गया।

ओमवीर शुरू से ही धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति हैं। जेल में कई दिन तनाव में गुजारने के बाद उन्होंने घर से गीता मँगाई और एक-एक श्लोक का अध्ययन और मनन किया। मन लगता गया और एक-एक दिन में पाँच-पाँच बार गीता का अध्ययन किया। अब हर श्लोक का भावार्थ वह आज के परिवेश में निकालने में सक्षम होने लगे थे। इस बीच जिला जेल में खुले विद्यालय में बतौर शिक्षक वे बंदियों को पढ़ाने भी लगे।

साथ ही गीता का सार अन्य कैदियों को भी समझाने लगे। उनकी इस लगन को देखते हुए जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज शर्मा ने उन्हें पुस्तक लिखने की प्ररेणा दी। पांच माह में उन्होंने गीता के सार पर आधारित करीब पांच सौ पन्ने लिख लिए। अब उनकी ख्याति जेल की दीवारों के बाहर भी पहुँचने लगी। स्वयं सेवी संस्था राष्ट्रीय युवा शक्ति के प्रमुख प्रदीप रघुनंदन ने इनकी पुस्तक को छपवाने का जिम्मा लिया। प्रदीप रघुनंदन ने बताया कि इस पुस्तक के दिसंबर माह में प्रकाशित होने की संभावना है।

जेल अधीक्षक ने बताया कि शिक्षक के गहन अध्ययन के कारण ही उनको विद्यालय में शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने पुस्तक लिखकर साबित कर दिया है कि जेल में रहकर भी रचनात्मक कार्य किये जा सकते हैं। उनको आशा है कि अन्य बंदी भी उनसे प्ररेणा लेंगे।

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  • Web Title:जेल के विद्यालय में बंदियों को पढ़ाने का भी कार्य